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पंचम जगद्गुरु
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1पंचम जगद्गुरु
2(१४ जनवरी १९५७)
3वर्तमान काल में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज विश्व के
4इतिहास में पंचम जगद्गुरु हैं। ये समन्वयवादी जगद्गुरु हैं; अतएव
5ये पूर्ववर्ती समस्त आचार्यों जगद्गुरु श्री शंकराचार्य, जगद्गुरु
6श्री निम्बार्काचार्य, जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य, जगद्गुरु श्री
7माध्वाचार्य एवं श्री चैतन्य महाप्रभु के दार्शनिक सिद्धान्तों को
8सही सिद्ध करते हुये अपना समन्वयवादी दार्शनिक सिद्धान्त प्रस्तुत
9करते हैं। इनके मतानुसार यद्यपि ईश्वर प्राप्ति के अनेक मार्ग हैं
10तथापि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वसुलभ मार्ग है, प्रत्येक जीव का
11लक्ष्य ‘स्वसुखवासना गन्ध लेश शून्य श्री कृष्ण
12सुखैकतात्पर्यमयी सेवा’ ही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु श्रवण,
13कीर्तन, स्मरण तीन प्रकार की प्रमुख भक्ति करनी होगी।