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Dainik Prarthana

Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits

युगल सरकार की आरती

Reading 11 of 21 · Source PDF 15–17

1युगल सरकार की आरती

2आरती प्रीतम, प्यारी की, कि बनवारी, नथवारी की।

3दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै,

4दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै,

5दुहुँन दृग प्रेम-सुधा छलकै,

6चसीले बैन, रसीले नैन, गँसीले सैन,

7दुहुँन मैनन मनहारी की ॥ 1॥

8दुहुँनि दृग चितवनि पर वारी,

9दुहुँनि लट-लटकनि-छवि न्यारी,

10दुहुँनि भौं-मटकनि अति प्यारी,

11रसन मुख पान, हँसन मुसकान, दसन दमकान,

12दुहुँनि बेसर छवि न्यारी की ॥ 2।।

13एक उर पीताम्बर फहरै,

14एक उर नीलाम्बर लहरै,

15दुहुँन उर लर-मोतिन छहरै,

16कंकनन खनक, किंकिनिन झनक,नूपुरन भनक,

17दुहुँन रुनझुन धुनि प्यारी की ॥ 3॥

18एक सिर मोर-मुकुट राजै,

19एक सिर चूनरि-छवि छाजै,

20दुहुँन सिर तिरछे भल भ्राजै,

21संग ब्रज-बाल,लाड़िली-लाल,बाँह गल डाल,

22“कृपालु” दुहुँन दृग चारी की ॥ 4॥

23अर्थ - हम प्रियतम श्यामसुन्दर एवं प्यारी श्री किशोरी जी की

24आरती करते हैं। दोनों के सिर पर सुवर्ण के मुकुट चमक रहे हैं।

25दोनों के कानों में सुन्दर कुण्डल हिल रहे हैं। दोनों की आँखों में

26प्रेमामृत रस छलक रहा है। दोनों की वाणी अत्यन्त मधुर है।

27दोनों के नेत्र अत्यन्त सरस हैं। दोनों के कटाक्ष अत्यन्त ही तीखे

28हैं। दोनों कामदेव के मन को भी हरने वाले हैं।

29मैं दोनों के परस्पर देखने पर बलिहार जाता हूँ। दोनों के घुँघराले

30बालों की छटा अत्यन्त ही निराली है। दोनों के भौहों के चलाने

31की रीति अत्यन्त ही आकर्षक है। दोनों के मुख में पान का रस

32है। दोनों का हँसना, मुस्काना मनमोहक है। दोनों के दाँतों की

33चमक अत्यन्त सुन्दर है। दोनों की बेसर झाँकी तो अत्यन्त ही

34निराली है।

35श्री श्याम सुन्दर के वक्षस्थल पर पीताम्बर फहरा रहा है। श्री

36किशोरीजी के वक्षस्थल पर नीलाम्बर लहरा रहा है। तथा दोनों

37के वक्षस्थल पर मोतियाँ की लड़ियाँ झूम रही हैं। दोनों के

38कंकण, दोनों की किंकिणि एवं दोनों के नुपुर की रुनझुन ध्वनि

39अत्यन्त ही मनोहारिणी है।

40श्री श्याम सुन्दर के सिर पर मोर-मुकुट सुशोभित है, श्री किशोरी

41जी के सिर पर सुन्दर चुनरी शोभायमान है एवं दोनों के सिर

42तिरछे होकर परस्पर मिले हुए शोभा दे रहे हैं। श्री“कृपालु” जी

43कहते हैं कि श्यामसुन्दर एवं किशोरी जी गले में परस्पर बाँह

44डाले हुए हैं, समीप में ही ब्रजांगनाएँ खड़ी हैं एवं प्रिया-प्रियतम

45एक दूसरे की ओर कटाक्षपात करते हुए देख रहे हैं।

Hindi and Sanskrit daily-prayer anthology, transcribed in its printed section order. It includes scriptural passages and selections by other saints; the title-page credit does not establish sole authorship of every passage. No separate English edition is inferred. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : मई 2010. Publisher: राधा गोविन्द समिति.

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