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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

चलो आली देखें लाली झुलन बहार,

Reading 110 of 112 · Source no. 98 · Source PDF 202–203

1चलो आली देखें लाली झुलन बहार,

2झूलें झूला लाली झुलवहिं रिझवार।

3झूला डर्यो गहवर कुंज मझार,

4रिमझिम रिमझिम परत फुहार।

5गावें मिलि ब्रजनार राग मलार,

6बाजे वीणा वेणु ढप ढोल इकसार।

7कूके पिक नाचे मोर पंख पसार,

8फूलें फूल चंपा जुही बेला कचनार।

9बिच बिच बोलें अलि मिलि बलिहार,

10बरसावे कुसुम कदंबनि डार।

11जड़ तरुगन तन पुलक अपार,

12चेतन खग मृग जड़ अनुहार।

13श्यामा श्याम बाम सुधि देह बिसार,

14लखत “कृपालु” शिव गोपी तनु धार।

15भावार्थ—एक सखी दूसरी सखी से कहती है-हे सखी! चलो

16श्रीराधा का झूलन उत्सव देखें। श्रीराधा झूला झूल रही हैं और

17श्रीकृष्ण झुला रहे हैं। गह्वर-वन की किसी कुंज में वृक्ष की डाल

18पर झूला पड़ा है। वर्षा की फुहारें पड़़ रही हैं। ब्रज-गोपियाँ मल्हार

19राग गा रही हैं। वीणा, वेणु ढप एवं ढोल आदि वाद्य एक स्वर से

20बज रहे हैं। कोयल “कुहू” “कुह”ू की ध्वनि कर रही है। मयूर पंख

21फैलाकर नृत्य कर रहा है। चम्पा, जूही, बेला एवं कचनार के

22फूल, फूल रहे हैं। बीच-बीच में सखियाँ मिलकर “बलिहार”

23“बलिहार” बोल उठती हैं। कदम्ब के वृक्ष की डाल से पुष्पों की

24वर्षा सी हो रही है। जड़ वृक्षों के शरीर में भी रोमांच छा रहा है।

25झूले के दृश्य को देखकर जो चेतन पक्षी एवं मृग थे, वे जड़

26की भाँति स्तब्ध रह गये। स्वयं श्यामा-श्याम एवं उनकी सखियाँ

27भी शरीर की सुध-बुध भूल गये। श्रीकृपालुजी कहते हैं- योगी

28राज शिव इस अद्भुत लीला को गोपी रूप धारण कर देख रहे हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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