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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

वारी वारी वारी छवि राधे, राधे राधे राधे।

Reading 109 of 112 · Source no. 97 · Source PDF 200–202

1वारी वारी वारी छवि राधे, राधे राधे राधे।

2सत चित आनँदघन तन राधे,

3कनक मुकुट सिर राधे, राधे राधे राधे।

4चंपक वरनि गौर तनु राधे,

5मोहति मोहन राधे, राधे राधे राधे।

6सिर झिलमिल चूनरि छवि राधे,

7शीशफूल भल राधे, राधे राधे राधे।

8घुँघुरारी वर वेणी राधे,

9सुघर चंद्रिका राधे, राधे राधे राधे।

10कानन कर्णफूल भल राधे,

11माथे बिंदी राधे, राधे राधे राधे।

12अति मतवारे नैनन राधे,

13मधुर बिलोकनि राधे, राधे राधे राधे।

14नथ बेसर नासा भल राधे,

15मृदु मुसुकनि मुख राधे, राधे राधे राधे।

16गर दुलरी तिलरी लर राधे,

17हार मणिन छवि राधे, राधे राधे राधे।

18नील बसन कर कंकन राधे,

19चूरिन चमकति राधे, राधे राधे राधे।

20कर अँगुरिन मुँदरिन दुति राधे,

21मेहँदी करतल राधे, राधे राधे राधे।

22कटि किंकिनि पग पायल राधे,

23अँगुरिन बिछुवनि राधे, राधे राधे राधे।

24अरुण मिहावरि चरनन राधे,

25लजत हंस गति राधे, राधे राधे राधे।

26रोम रोम चुये ब्रजरस राधे,

27पियेँ रसिकजन राधे, राधे राधे राधे।

28करहु कृपालु कृपा अब राधे,

29तुम “कृपालु” पर राधे, राधे राधे राधे।

30भावार्थ—श्रीराधे! तुम्हारी छवि पर मैं बलिहार जाता हूँ। तुम्हारा

31शरीर सच्चिदानंद घनमय है। सिर पर स्वर्ण का मुकुट शोभित है।

32चम्पक पुष्प के समान अपने गौर-वर्ण के तन से मन-मोहन कृष्ण

33के मन को भी मोहित कर लेती हो। सिर पर चुनरी झिलमिला रही

34है। शीशफूल की शोभा न्यारी ही है। सुन्दर घुँघराली वेणी है।

35चन्द्रिका की छवि न्यारी है। कानों में कर्णफूल एवं माथे पर बिन्दी

36है। मतवाले नेत्रों की चितवनि बाँकी ही है। नथ एवं बेसर नासिका

37में शोभा पा रही है। मुख पर मधुर मुस्कान है। गले में दुलरी एवं

38तिलरी की लड़ तथा मणियों के हार शोभा पा रहे हैं। नीला वस्त्र

39अंगों पर छविमान है। हाथों में कंकण एवं चूड़ियों की चमक है।

40हाथ में अँगूठियों की चमक एवं करतल में मेहँदी लगी है। कटि

41में किंकिणी एवं पैरों में पायल तथा उँगलियों में बिछुए शोभा पा

42रहे हैं। लाल मिहावर चरणों में लगाया गया है, मतवाली चाल

43हंस को लज्जित करती है। श्रीराधा के रोम-रोम से ब्रजरस टपकता

44रहता है। जिसे भक्तगण पान करते हैं। हे कृपामयी राधे! अब तो

45“कृपालु” पर भी कृपा करो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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