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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरी प्यारी जू रँगीली महल वारी।

Reading 108 of 112 · Source no. 96 · Source PDF 199–200

1मेरी प्यारी जू रँगीली महल वारी।

2वारी वारी जाऊँ वारी बरसाने वारी।

3प्यारी प्यारी अति भोरी भारी सुकुमारी।

4वारी बनवारी जापै अस छवि प्यारी।

5जब चलैं सजि ब्रजनारी सँग प्यारी।

6कह बलिहारी बलिहारी बनवारी।

7जब कुंज सेज पौढ़ैं प्यारी।

8चापैं पग ललितादिक नारी।

9तब ललचावैं लखि बनवारी।

10सोचैं चापन कहँ पग प्यारी।

11टेढ़ो मुख करि सब ब्रजनारी।

12दिखराव अँगूठा बनवारी।

13पुनि पुनि कर जोरैं बनवारी।

14तब कृपामयी सब ब्रजनारी।

15पिय को बुलाय लें ब्रजनारी।

16चापैं “कृपालु” पिय पग प्यारी॥

17भावार्थ—महलों वाली, रँगीली बरसाने-वाली राधा पर मैं

18बलिहार जाता हूँ। सुकुमारी राधा अत्यन्त ही भोली भाली हैं।

19उनकी छवि इतनी मनोहारिणी है कि श्यामसुन्दर भी उन पर

20अपना सर्वस्व निछावर करते हैं। सोलह शृंगार धारणकर

21ब्रजगोपियों के साथ जब श्रीराधा चलती हैं, नंदनंदन उस समय

22बलिहार बलिहार कह उठते हैं। सखियों द्वारा सुसज्जित सेज

23पर जब श्रीराधा शयन करती हैं, ललिता आदि सखियों को

24चरण दबाते देखकर लाल ललचाते हैं। वे भी श्रीराधा के चरण

25दबाने की लालसा करते हैं। श्रीराधा की सखियाँ उस समय

26टेढ़ा मुख कर उन्हें अँगूठा दिखाकर खिझाती हैं। श्यामसुन्दर

27पुनः पुनः हाथ जोड़कर सखियों से प्रार्थना करते हैं, श्री

28कृपालुजी कहते हैं- तब कृपामयी ब्रजगोपियाँ उन्हें अन्तःपुर

29में बुलाकर अपनी सखी राधा की चरण-सेवा प्रियतम को प्रदान

30करती हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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