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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरी बरसाने वारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Reading 107 of 112 · Source no. 95 · Source PDF 197–198

1मेरी बरसाने वारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

2प्राननप्यारेहुँ प्राननप्यारी,

3मेरी वृषभानुदुलारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

4जब जब निकले प्यारी सवारी,

5पिय बोलें जय जय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

6जहँ जहँ चरन धरत निज प्यारी,

7तहँ तहँ सिर बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

8जब चह रास करन बनवारी,

9मुकुट धरत पग प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

10लखि सोरह सिँगार सुकुमारी,

11कह बलिहार बिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

12प्यारी पाछे गोप कुमारी,

13तिन पाछे बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

14जब जब रूठति भानुदुलारी,

15धरत वेष पिय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

16जेहि डर डरत ब्रह्म बनवारी,

17सोइ “कृपालु” मम प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

18भावार्थ—मेरी बरसाने वाली वृषभानुनन्दिनी प्राण प्यारे कृष्ण

19को प्राणाधिक प्रिय हैं। जब श्रीराधा की सवारी निकलती है, तब

20श्रीकृष्ण जय जयकार करते हैं। श्रीराधा जहाँ जहाँ चरण रखती हैं,

21वहाँ वहाँ श्रीकृष्ण अपना मुकुट युक्त मस्तक रखते हैं। श्रीकृष्ण

22की जब रास करने की इच्छा होती है तो श्रीराधा के चरणों में

23अपना मुकुट रखते हैं। सुकुमारी राधा का सोलह शृंगार देखकर

24श्रीकृष्ण बलिहार जाते हैं। श्रीराधा के पीछे ब्रजगोपियाँ चलती हैं

25एवं उनके पीछे-पीछे श्रीकृष्ण चलते हैं। जब-जब श्रीराधा रूठती

26हैं तब-तब सखी वेष धारण कर प्रिया की समीपता प्राप्त करते हैं।

27श्री “कृपालुजी” कहते हैं- ब्रह्म श्रीकृष्ण जिसके भय से भयभीत

28रहते हैं वही राधा मेरी स्वामिनी हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version