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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

बलि अलबेली सरकार, बलि भोरी भानुदुलार।

Reading 106 of 112 · Source no. 94 · Source PDF 195–197

1बलि अलबेली सरकार, बलि भोरी भानुदुलार।

2बलि भल सोरह शृंगार, जय जयति जयति सुकुमार॥

3बलि शीश फूल सिर धार, बलि वेणी सुमन सँवार।

4बलि चूनरि जरिन किनार, जय जयति जयति सुकुमार॥

5बलि बिन्दी लाल लिलार, बलि कर्ण फूल श्रुति धार।

6बलि काजर दृग कजरार, जय जयति जयति सुकुमार॥

7बलि चितवनि लखि रिझवार, बलि मुर्छित नंदकुमार।

8बलि मुसकनि जादू डार, जय जयति जयति सुकुमार॥

9बलि नासा बेसर धार, बलि नथ छवि अति छविदार।

10बलि लर मोतिन रिझवार, जय जयति जयति सुकुमार॥

11बलि मणि कंकण बलिहार, बलि चूरिन छवि छविदार।

12बलि अँगुरिन मुँदरिन धार, जय जयति जयति सुकुमार॥

13बलि मणि पहुँची छविदार, बलि बाजूबंद बहार।

14बलि मेहँदी सुघर सँवार, जय जयति जयति सुकुमार॥

15बलि विविध मणिन उर हार, बलि दुलरी तिलरी धार।

16बलि उर कंचुकि छविदार, जय जयति जयति सुकुमार॥

17बलि नीलांबर तनु धार, बलि मणि किंकिणि छविदार।

18बलि पग पायल झनकार, जय जयति जयति सुकुमार॥

19बलि बिछुवनि छवि छविदार, बलि पद नख मणि रिझवार।

20बलि तनु बह ब्रज रस धार, बलि बलि “कृपालु” सरकार॥

21भावार्थ—अलबेली सरकार श्रीराधा पर मैं बलिहार जाता हूँ।

22भोली-भाली भानुनन्दिनी पर मैं बलिहार जाता हूँ। श्रीराधा के सोलह

23शृंगार पर मैं बलिहार जाता हूँ। सुकुमारी राधा की सदा ही विजय

24हो। सिर के शीशफूल की बलिहारी है। सुमनों से सुसज्जित वेणी

25की बलिहारी है। जरी से युक्त किनारी वाली चुनरी की बलिहारी

26है। सुकुमारी राधा जय को प्राप्त हों। ललाट की लाल बिन्दी की

27बलिहारी है। कानों के कर्णफूल की बलिहारी है, कजरारे नेत्रों में

28डाले हुए काजल की भी बलिहारी है। सुकुमारी राधा की सदा ही

29जय हो। जिनकी जादू भरी चितवन को देखकर नंदनन्दन मूर्च्छित

30हो जाते हैं। मुस्कान का जादू तो और भी विलक्षण है, सुकुमारी

31राधा की सदा ही जय हो। नासिका की बेसर की बलिहारी है।

32अत्यन्त सुन्दर नथ की बलिहारी है। मोतियों की सुन्दर लड़ की

33बलिहारी है, सुकुमारी राधा की जय हो। मणियों के कंकणों की

34बलिहारी है सुन्दर चूड़ियों की बलिहारी है। हाथ की उँगलियों की

35अँगूठियों की बलिहारी है। सुकुमारी राधा की जय हो। छवि से

36युक्त मणि-जटित पहुँचियों की बलिहारी है। भुजाओं के बाजूबन्द

37की शोभा की बलिहारी है। करतल की सुन्दर सँवारी हुई मेहँदी की

38बलिहारी है। सुकुमारी राधा की सदा ही जय हो। हृदय पर झूलते

39हुए भाँति-भाँति की मणियों के हार की बलिहारी है। दुलरी, तिलरी

40की बलिहारी है। वक्षःस्थल पर धारण की हुई छवि से युक्त कंचुकी

41की बलिहारी है। सुकुमारी राधा की सदा ही जय हो। अंगों पर

42धारण किये हुए नीले वस्त्र की बलिहारी है। सुन्दर मणियों से जड़ी

43हुई किंकिणी की बलिहारी है। चरणों की पायल की झनकार की

44बलिहारी है। सुन्दर बिछुओं की छवि की बलिहारी है। चरणों के

45नख-मणियों की बलिहारी है। श्रीराधा के उस दिव्य वपु की बलिहारी

46है जिससे ब्रजरस की धारा निरन्तर प्रवाहित होती रहती है। श्री

47कृपालुजी कहते हैं ऐसी कृपामयी सरकार श्रीराधा की बलिहारी है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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