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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

रसिकन जीवन राधा, गोपी जन धन राधा।

Reading 104 of 112 · Source no. 92 · Source PDF 192–193

1रसिकन जीवन राधा, गोपी जन धन राधा।

2जीवन जीवन राधा, राधा राधा राधा॥

3अवढर दानी राधा, ब्रज रसखानी राधा।

4ब्रज महरानी राधा, राधा राधा राधा॥

5हैं प्रेम धनी राधा, हैं रूप धनी राधा।

6हैं कृपा धनी राधा, राधा राधा राधा॥

7हैं दीनबन्धु राधा, पतितन पावनि राधा।

8करुणा कारिणि राधा, राधा राधा राधा॥

9हैं महाभाव राधा, हैं आह्लादिनि राधा।

10हैं वरदायिनि राधा, राधा राधा राधा॥

11हैं गजगामिनि राधा, छवि अभिरामिनि राधा।

12श्यामहुँ स्वामिनि राधा, राधा राधा राधा॥

13हरि गावत गुन राधा, हरि ध्यावत छवि राधा।

14हरि सेवत नित राधा, राधा राधा राधा॥

15हरि चापत पग राधा, हरि तकत भृकुटि राधा।

16हरि रिझवत नित राधा, राधा राधा राधा॥

17हैं पूर्ण ब्रह्म राधा, हरि आराधित राधा।

18हरि प्राणेश्वरि राधा, राधा “कृपालु” राधा॥

19भावार्थ—श्रीराधा रसिकों की जीवन स्वरूपा हैं। गोपीजनों

20की सर्वस्व हैं। सम्पूर्ण जीवों को भी जीवन प्रदान करनेवाली हैं।

21उदार हृदया राधा दान देते समय कभी पात्रता का विचार नहीं

22करतीं। श्रीराधा ब्रजरस की खान हैं। श्री राधा ही ब्रजमण्डल की

23महारानी हैं। श्रीराधा प्रेम, रूप एवं कृपा रूपी धन से धनी हैं।

24श्रीराधा दीनों पर ही विशेष रूप से कृपा करती हैं। पतितों को

25पावन करने वाली श्रीराधा ही हैं। श्री राधा अत्यन्त ही करुणामयी

26हैं। श्री राधा महाभाव स्वरूपिणी हैं। श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति

27हैं। जीवों पर द्रवित होकर वर देने वाली श्रीराधा ही हैं। श्रीराधा

28मतवाले गजराज की सी गति वाली हैं। उनकी छवि अत्यन्त ही

29मनोहारिणी है। श्रीराधा श्रीकृष्ण की भी स्वामिनी हैं। श्रीकृष्ण निरन्तर

30श्रीराधा के गुणों का गान करते हैं, श्रीराधा की ही छवि का ध्यान

31करते हैं। निरन्तर श्रीराधा की सेवा में रत रहते हैं। श्रीकृष्ण श्रीराधा

32के चरणों का संवाहन करते हैं, श्रीराधा की भृकुटि को ही ताकते

33रहते हैं। श्रीकृष्ण अनेक प्रकार से श्रीराधा को प्रसन्न करने की

34चेष्टा करते हैं। श्रीराधा ब्रह्मस्वरूपा हैं, श्रीराधा श्रीहरि द्वारा आराधित

35हैं।

36श्री कृपालुजी कहते हैं- कहाँ तक कहूँ श्रीराधा तो श्रीकृष्ण के

37प्राणों की अधिष्ठात्री देवी ही हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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