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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भोरी भारी प्यारी, मोहे मन बनवारी।

Reading 98 of 112 · Source no. 86 · Source PDF 182

1भोरी भारी प्यारी, मोहे मन बनवारी।

2अगनित रति दउँ वारी, अस बरसाने वारी॥

3जब कबहूँ नथवारी, निकले ब्रज असवारी।

4जय बोलें बनवारी, अस बरसाने वारी॥

5बैठें जब सुकुमारी, सिंहासन पर प्यारी।

6पग चापेँ बनवारी, अस बरसाने वारी॥

7जब करें मान प्यारी, दृग जल भरि बनवारी।

8कर पुनि पुनि मनुहारी, अस बरसाने वारी॥

9लखि लखि छवि सुकुमारी, भूलें सुधि बनवारी।

10पुनि पुनि कह बलिहारी, अस मम “कृपालु” प्यारी॥

11भावार्थ—भोली-भाली राधा श्रीकृष्ण के मन को मोहित करने

12वाली हैं। बरसाने वाली श्रीराधा पर असंख्य रति निछावर की जा

13सकती हैं। नसिका में नथ धारण करने वाली राधा की जब ब्रज में

14सवारी निकलती है, तब वन में विचरण करने वाले श्रीकृष्ण उनकी

15जय जयकार करते हैं। जब सुकुमारी राधा सिंहासन पर विराजमान

16होती हैं, तब श्रीकृष्ण उनके चरणों को दबाते हैं। जब कभी मानिनी

17राधा प्रियतम से मान ठानती हैं तब नेत्रों में जल भरकर श्रीकृष्ण

18बार-बार उन्हें मनाते हैं। सुकुमारी राधा की छवि को देखकर श्रीकृष्ण

19अपनी सुधबुध भूल जाते हैं। श्री राधा पर वे बार-बार बलिहार

20जाते हैं “श्री कृपालुजी” कहते हैं कि मेरी श्रीराधा ऐसी गुन गर्वीली

21हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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