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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मम स्वामिनि श्यामा जू, मम जीवनि श्यामा जू।

Reading 83 of 112 · Source no. 71 · Source PDF 146–148

1मम स्वामिनि श्यामा जू, मम जीवनि श्यामा जू।

2मम भामिनि श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

3मम माता श्यामा जू, मम दाता श्यामा जू।

4मम त्राता श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

5मम शासक श्यामा जू, मम पालक श्यामा जू।

6मम प्रेरक श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

7मम मन महँ श्यामा जू, मम नैनन श्यामा जू।

8मम प्रानन श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

9भीतर भी श्यामा जू, बाहर भी श्यामा जू।

10दसहूँ दिसि श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

11गावूँ गुन श्यामा जू, ध्यावूँ छवि श्यामा जू।

12लावूँ उर श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

13दीनन की श्यामा जू, पतितन की श्यामा जू।

14अधमन की श्यामा जू, जय जय जय श्यामा जू॥

15रसखानी श्यामा जू, सुखदानी श्यामा जू।

16ब्रजरानी श्यामा जू, हैं “कृपालु” श्यामा जू॥

17भावार्थ—भक्त अपने भाव प्रकट करते हुए कहता है- मेरी

18एकमात्र स्वामिनी श्रीराधा ही हैं। मेरी स्वामिनी श्रीराधा ही मेरी जीवन

19प्रदायिनी हैं। श्रीकृष्ण-भामिनी श्रीराधा की सदैव ही जय हो। श्रीराधा

20ही मेरी माँ हैं। मेरे लिये दानी शिरोमणि भी श्रीराधा ही हैं। मेरी रक्षा

21करने में भी श्री राधा सदा तत्पर रहती हैं। ऐसी मेरी स्वामिनी की

22सदैव ही विजय हो। मुझ पर शासन करने वाली भी एकमात्र श्रीराधा

23ही हैं। मेरा पालन पोषण भी उनकी कृपा पर ही निर्भर है। मेरे मन

24बुद्धि आदि को तत्कर्म करने की प्रेरणा भी श्रीराधा द्वारा ही प्राप्त होती

25है। ऐसी श्रीराधा सदैव विजयिनी बनें। मेरे मन में एकमात्र श्रीराधा का

26ही साम्राज्य है। मेरे नेत्रों में भी श्रीराधा की ही मनोहारिणी छवि छाई

27है। मेरे प्राणों पर भी श्री राधा का ही आधिपत्य है। ऐसी मेरी श्रीराधा

28सदा सर्वदा जय को प्राप्त हों। मेरे भीतर भी मेरी स्वामिनी ही

29विराजमान हैं। शरीर के बाहर भी एकमात्र श्रीराधा ही हैं। दसों

30दिशाओं में सर्वव्यापिनी श्री राधा ही मुझे दृष्टिगत हों। मैं सदा सर्वदा

31अपनी इष्ट देवी श्री राधा का ही गुणगान करता रहूँ। श्रीराधा की छवि

32मेरे हृदय में छाई रहे। नेत्रों में उनका ही ध्यान रहे। त्रिभुवन में दीन-

33जनों पर दया-दृष्टि करने वाली एकमात्र मेरी श्री राधा ही हैं। पतितों

34का उद्धार करने में वे कभी विलम्ब नहीं करतीं। मेरे जैसे अधमों को

35भी उनकी दया का ही आश्रय है। ऐसी मेरी स्वामिनी श्यामा सदा

36श्रीकृष्ण द्वारा पूजित हों। एकमात्र श्रीराधा ही रस की अम्बुधि हैं सभी

37प्राणियों को सच्चा सुख देने वाली भी एकमात्र श्रीकृष्ण प्रिया राधा

38ही हैं। ब्रजमंडल की अधीश्वरी श्री राधा अत्यन्त ही कृपालु हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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