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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरी तो हैं जीवन राधे, राधे राधे राधे।

Reading 78 of 112 · Source no. 66 · Source PDF 138–140

1मेरी तो हैं जीवन राधे, राधे राधे राधे।

2काउ के हैं जग महँ धन बल राधे,

3मम निर्धन बल राधे, राधे राधे राधे।

4काउ बल कर्म ज्ञान को राधे,

5मम निर्बल बल राधे, राधे राधे राधे।

6सब बल समल जगत के राधे,

7तव बल निर्मल राधे, राधे राधे राधे।

8इक दिन सब बल तजि दें राधे,

9तव बल नित सँग राधे, राधे राधे राधे।

10सब बल दुख परिणामी राधे,

11तव बल सुखमय राधे, राधे राधे राधे।

12सब बल मायिक नीरस राधे,

13तव बल रस प्रद राधे, राधे राधे राधे।

14सब बल में भय ही भय राधे,

15तव बल निर्भय राधे, राधे राधे राधे।

16सब बल मायिक गुणमय राधे,

17तव बल निर्गुण राधे, राधे राधे राधे।

18सब बल तो हैं सीमित राधे,

19बल असीम तव राधे, राधे राधे राधे।

20सब बल अंश तिहारे राधे,

21तव बल अंशी राधे, राधे राधे राधे।

22तज्यो “कृपालु” अंश बल राधे,

23गहि अंशी बल राधे, राधे राधे राधे॥

24भावार्थ—भक्त अपनी भावना प्रकट करते हुए कहता है-श्री

25राधा ही मेरी जीवन-स्वरूपा हैं। संसार में किसी को धन का बल

26है परन्तु मुझ निर्धन का बल तो राधा ही हैं। किसी को कर्म एवं

27किसी को ज्ञान का बल है, मुझ निर्बल की बल-स्वरूपा तो श्रीराधा

28ही हैं। संसार के समस्त बल मल से पूर्ण हैं, तुम्हारा बल ही निर्मल

29है। संसार के सभी बल- धन, परिवार मित्र आदि एक दिन जीव

30का परित्याग कर देते हैं, तुम्हारा बल ही सदा साथ रहता है। सभी

31बल परिणाम में दुःखप्रद हैं, तुम्हारा बल ही सुख प्रदान करने

32वाला है। मायिक सभी बल अत्यन्त ही नीरस हैं, तुम्हारा ही बल

33रस प्रदाता है। संसार के सभी बल भय से युक्त हैं। सांसारिक बल

34माया के गुणों से युक्त हैं, तुम्हारा बल ही दिव्य है। अन्य सभी बल

35सीमित हैं। तुम्हारा बल ही असीम है। समस्त बल तुम्हारे ही अंश

36हैं, तुम्हारा बल उनका अंशी है। हे कृपालु राधे! मैंने तो आंशिक

37बलों का त्यागकर तुम्हारे अंशी स्वरूप बल का आश्रय लिया है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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