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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

बामा बना दे मोहिं श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

Reading 77 of 112 · Source no. 65 · Source PDF 137–138

1बामा बना दे मोहिं श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

2दिव्य धाम बरसानो श्यामा,

3जनमूँ तहँ बनि बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

4पावूँ नित नव सेवा श्यामा,

5सँग रहि तव ब्रज बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

6देउँ बुहारी सँग ब्रज बामा,

7रास करहु जहँ श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

8मर कर भी न तजूँ तव धामा,

9कृपा करहु अस श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

10लीला हित वृन्दावन धामा,

11चलूँ संग तव श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

12तव रुचि महँ राखौं रुचि श्यामा,

13जिमि सिगरी ब्रज बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

14हौं नहिं चह वैकुंठहुँ धामा,

15गोलोकहुँ नहिं श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

16हौं “कृपालु” चह सेवा श्यामा,

17निशिदिन आठोँ यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

18भावार्थ—भक्त श्रीराधा से याचना करता है-हे श्रीराधे! मुझे

19भी ब्रजगोपी बना देना। तुम्हारे दिव्य बरसाने धाम में गोपी बनकर

20जन्म लूँ। अन्य ब्रजगोपियों के साथ रहते हुए मुझे तुम्हारी नित्य

21नवीन सेवाएँ प्राप्त होती रहें। जिस स्थान पर तुम रासविलास करो

22उस स्थान को मैं झाड़ बुहार कर स्वच्छ रखूँ। हे श्यामा! ऐसी कृपा

23करो जिससे कि मैं मृत्यु के उपरान्त भी तुम्हारे धाम का परित्याग

24न करूँ। जब तुम लीला-विहार के हेतु वृन्दावन पधारो तब तुम्हारे

25अनुगत होकर तुम्हारे पीछे पीछे चलूँ। जिस प्रकार समस्त ब्रजगोपियाँ

26तुम्हारी रुचि में ही अपनी रुचि रखती हैं-मैं भी अपनी इच्छा को

27तुम्हारी इच्छा में जोड़़ दूँ। हे राधे! मुझे वैकुण्ठ गोलोक धाम को

28प्राप्त करने की इच्छा नहीं है। हे कृपालु राधे! मैं तो आठों पहर

29तुम्हारी सेवा में ही रहना चाहती हूँ।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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