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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

तू है को री ओरी ब्रज गोरी, गोरी गोरी गोरी।

Reading 50 of 112 · Source no. 38 · Source PDF 86–88

1तू है को री ओरी ब्रज गोरी, गोरी गोरी गोरी।

2वारौँ रति छवि लखि छवि तोरी,

3एतिक सुन्दरि गोरी, गोरी गोरी गोरी।

4तोरी सुंदरता सम तोरी,

5लग सुंदरता गोरी, गोरी गोरी गोरी।

6लखतहिं तूने मम चित चोरी,

7जादूगरनी गोरी, गोरी गोरी गोरी।

8काकी है गोरी तू छोरी,

9कौन गाम रह गोरी, गोरी गोरी गोरी।

10मैं हूँ भानुभूप की छोरी,

11बरसाने की गोरी, गोरी गोरी गोरी।

12नाम बता टुक लखु मम ओरी,

13नाम राधिका गोरी, गोरी गोरी गोरी।

14मोरी तोरी बनि जाय जोरी,

15जो माने तू गोरी, गोरी गोरी गोरी।

16हौं तो बनन चहौं पिय तोरी,

17सदा सदा को गोरी, गोरी गोरी गोरी।

18तूने हूँ तो मम चित चोरी,

19भूली तनु सुधि गोरी, गोरी गोरी गोरी।

20युग युग जिय “कृपालु” दोउ जोरी,

21पिय हरि प्यारी गोरी, गोरी गोरी गोरी॥

22भावार्थ—श्रीकृष्ण ने प्रथम बार श्रीराधा का दर्शन किया

23उनके रूप पर मुग्ध हुए वे उनसे उनका परिचय पूछ रहे हैं। हे

24ब्रजसुन्दरी! तुम कौन हो? तुम्हारी शोभा को देखकर तो मैं रति

25की सुन्दरता को भी न्यौछावर कर सकता हूँ। हे गौरवर्ण वाली

26सुन्दरी! तुम इतनी अधिक सुंदर हो कि तुम्हारे सौन्दर्य की उपमा

27तुम्हारे ही सौन्दर्य से की जा सकती है। हे ब्रजगोरी! तुमने अपने

28प्रथम दर्शन में ही- अपने रूप का जादू मुझ पर डाल दिया है।

29वस्तुतः तुम तो जादूगरनी ही प्रतीत होती हो। तुम किसकी पुत्री

30हो? किस ग्राम में वास करती हो? श्रीराधा ने उत्तर दिया। मैं

31वृषभानु की पुत्री हूँ और बरसाना ग्राम में रहती हूँ। पुनः श्रीकृष्ण

32ने राधा से कहा-तनिक मेरी ओर देखकर अपना नाम तो बताओ।

33श्रीराधा ने कहा-मेरा नाम राधा है। श्रीकृष्ण ने राधा से पुनः

34कहा-यदि तुम्हें मेरी बात स्वीकार हो तो मैं तुम्हारे साथ अपना

35विवाह करना चाहता हूँ। मेरी तुम्हारी जोड़ी बड़ी सुन्दर प्रतीत

36होगी। श्रीराधा कहती हैं-मैं तो सदा के लिये ही तुम्हारी बनना

37चाहती हूँ। तुमने भी मेरा चित्त चुरा लिया है। मैं अपनी सारी

38सुध-बुध भूल चुकी हूँ। श्री कृपालुजी युगल जोड़ी को आशीर्वाद

39देते हुए कहते हैं कि यह प्रिया-प्रियतम की जोड़ी अमर रहे।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version