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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

कब मिलिहौ नंद कुमार, तुम मातु पिता भरतार।

Reading 30 of 112 · Source no. 18 · Source PDF 49–50

1कब मिलिहौ नंद कुमार, तुम मातु पिता भरतार।

2यह कह तेरी श्रुति चार, अब सुन लो मोर पुकार॥

3तव अगनित जन सरकार, हमरे इक तुम आधार।

4दुख पाये विविध प्रकार, अब सुन लो मोर पुकार॥

5लख चौरासी तनु धार, जनमेउ जग बारंबार।

6रह देखत तुम सरकार, अब सुन लो मोर पुकार॥

7तव माया तो सरकार, बहिरंगा शक्ति तिहार।

8सब जगहिं नचावन हार, अब सुन लो मोर पुकार॥

9माया तव बल सरकार, ब्रह्मादि नचावन हार।

10का शक्ति “कृपालु” हमार, अब सुन लो मोर पुकार॥

11भावार्थ—भक्त प्रार्थना करते हुए कहता है-हे नन्द के लाड़िले

12लाल! मेरे जीवन में वह सौभाग्यशाली दिन कब आयेगा जब मैं

13सदा-सदा के लिये तुम्हें अपना बना लूँगा? चारों वेद पुकार-पुकार

14कर कह रहे हैं कि तुम ही मेरे माता, पिता एवं पति हो। अतः मेरा

15करुण क्रन्दन सुनकर आनाकानी न करो। मैं स्वीकार करता हूँ कि

16तुम्हारे तो सभी जीव हैं-जीव अनन्त एक भगवन्ता।

17परन्तु मेरे आश्रय-स्थल तो एकमात्र तुम ही हो। मैंने अभी तक

18माया के कारण तुमसे विमुख होकर अत्यन्त दुःख पाये हैं। दैहिक,

19दैविक, भौतिक तापों से तप्त हुआ मैं अब तुम्हारे द्वार पर आया हूँ,

20अब देर न करो। चौरासी लाख शरीर धारण कर असंख्य बार संसार

21में जन्म लेता रहा। तुम तटस्थ बनकर सब कुछ देखते रहे। अब तो

22मेरी सुधि लो। तुम्हारी माया बहिरंगा-शक्ति होने के कारण सम्पूर्ण

23जगत् पर शासन कर रही है। इस माया से मुझे बचा लो। तुम्हारी

24शक्ति पाकर तुम्हारी दैवी माया ब्रह्मा को भी नहीं छोड़ती हे कृपालु

25तब फिर हमारे जैसों की तो गणना ही क्या है; अतः अब तो हमारी

26भी सुधि ले लो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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