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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

नंददुलारे प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

Reading 26 of 112 · Source no. 14 · Source PDF 41–43

1नंददुलारे प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

2हमहूँ तो हैं अंश तिहारे,

3वेद पुरान पुकारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

4अंश न हों अंशी ते न्यारे,

5जल तरंग जनु प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

6आत्माहू आत्मा तुम प्यारे,

7चारिहुँ वेद पुकारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

8तेरी माया ते तो हारे,

9शिव सनकादिक सारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

10तेरी अनुकंपा चह सारे,

11ब्रह्मादिक भी प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

12कर्मी, ज्ञानी, योगी सारे,

13चहत कृपा तव प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

14तुम ही हो आधार हमारे,

15तुम बिनु हम नहिं प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

16आत्मा रह भीतर तव प्यारे,

17तबहूँ मोहिं बिसारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

18अब “कृपालु” अस करु कछु प्यारे,

19होयँ न हम तुम न्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

20भावार्थ—हे नन्दलाल! तुम्हारे वेदों ने घोषणा की है कि हम

21जीवात्मा तुम्हारे ही अंश हैं। गीता में भी तुमने कहा-ममैवांशो

22जीवलोके जीवभूतः सनातनः।हे मेरे प्रियतम! जिस प्रकार जल

23से तरंग पृथक् नहीं हो सकती, इसी प्रकार तुम्हारा अंश स्वरूप

24जीवात्मा तुम अंशी से पृथक् होकर अपना अस्तित्व ही खो बैठेगा।

25मेरे प्राणों के प्राण! तुम मेरी आत्मा की आत्मा हो, ऐसा चारों वेद

26पुकार पुकारकर कह रहे हैं। हे श्यामसुन्दर! शिव एवं सनकादिक

27जैसे योगी एवं ब्रह्मचारी महापुरुष भी तुम्हारी माया को जीतने में

28असमर्थ रहे। (शिव मोहिनी अवतार को देखकर काम विवश हो

29गये। सनकादिक को बैकुण्ठ के द्वार पर प्रवेश किये जाने से रोकने

30पर वे क्रोधाभिभूत हो गये।) ब्रह्मा सृष्टिकर्ता होकर भी तुम्हारी

31माया से मोहित हो जाते हैं; अतः तुम्हारी कृपा की ही याचना

32करते हैं। कृष्णावतार में वन भोजन के समय ग्वालों की जूठन

33खाते हुए गोपाल का दर्शन कर ब्रह्मा मोह को प्राप्त हो गये थे।

34कर्मकाण्डी, ज्ञानी एवं योगी अपनी साधना में सफलता पाने हेतु

35तुम्हारी कृपा की ही प्रतीक्षा करते हैं। हे मेरे प्राणपति! हमारे एकमात्र

36आश्रय तुम ही हो। तुम्हारे बिना हमारा जीवन मृत्यु से भी कष्टप्रद

37है। हे नाथ! मुझे आश्चर्य तो इस बात का है कि मेरी आत्मा निरन्तर

38तुममें ही निवास करती है। परन्तु मुझे तुम्हारे सामीप्य का अनुभव

39नहीं होता। तुमने मुझे क्यों भुला दिया है? हे मेरे परम प्रेमी कुपालु

40प्रभु! अब तो ऐसा कुछ उपाय करो जिससे कि अनन्त काल के

41लिये हमारा तुम्हारा मिलन हो जाय, पुनः कभी बिछुड़ना न हो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version