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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ये अस गूजरि मैया, मैया मेरी मैया।

Reading 73 of 119 · Source no. 62 · Source PDF 132–133

1ये अस गूजरि मैया, मैया मेरी मैया।

2जस कहुँ तीन लोक महँ मैया,

3भईं, न ह्वैहैं मैया, मैया मेरी मैया।

4इन सबने मम चलनो मैया,

5दूभर करि दियो मैया, मैया मेरी मैया।

6मम पाछे चल सबरी मैया,

7जित जाऊँ मैं मैया, मैया मेरी मैया।

8डाट खाँय जब निज घर मैया,

9मोय सतावें मैया, मैया मेरी मैया।

10हौं भोरो इकलो रह मैया,

11ये हैं लख लख मैया, मैया मेरी मैया।

12झूठहि इनको भोजन मैया,

13झूठ व्यसन इन मैया, मैया मेरी मैया।

14इनहिं दया नहिं नेकहुँ मैया,

15अति दुख दें मोहिं मैया, मैया मेरी मैया।

16कैसेहुँ बचि आऊँ जब मैया,

17तब आवें इत मैया, मैया मेरी मैया।

18झूठहिं देत उरहनो मैया,

19दे भगाय इन मैया, मैया मेरी मैया।

20कह “कृपालु” दोउन ही मैया,

21अति झूठे सुनु मैया, मैया मेरी मैया।

22भावार्थ—बालकृष्ण माता यशोदा से कहते हैं- मैया!

23ब्रजगोपियों के समान स्त्रियाँ न तो तीनों लोकों में अभी तक

24हुई हैं न भविष्य में होंगी। इन गोपियों ने तो मेरा ब्रज में घूमना

25फिरना भी कठिन कर दिया। मैं जिधर जाता हूँ उधर ही ये सब

26मेरे पीछे पीछे चल देती हैं। जब घर पर इनकी सास ननद

27आदि इन्हें फटकारती हैं तब ये उनसे तो कुछ कह नहीं सकतीं,

28मुझे ही तंग करती हैं। मैं तो भोला भाला अकेला रहता हूँ, ये

29ब्रज गोपियाँ लाखों की संख्या में हैं। इनका भोजन व्यसन सब

30झूठ का ही है। इनके हृदय में तनिक भी दया का लेश नहीं है।

31ये मुझे अत्यन्त दुःख देती हैं। जब मैं इनसे अपनी जान बचाकर

32घर पर आता हूँ तो ये घर पर भी आ जाती हैं। इनके ताने,

33उलाहने सब झूठे ही हैं। इन्हें अपने घर से भगा दो।“कृपालु”

34कहते हैं- हे यशोदे! तुम्हारा पुत्र कृष्ण एवं गोपियाँ दोनों ही

35अत्यन्त झूठे हैं। गोपियों की कामना पूर्ण करने कृष्ण उनके घर

36जाते हैं परन्तु यशोदा के समक्ष यही कहते हैं कि मैं कहीं नहीं

37जाता; अतः झूठे हैं। गोपियाँ उलाहना देने के बहाने से कृष्ण

38का दर्शन करने आती हैं, अतः झूठी हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version