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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मोरिहुँ सुनु टुक मैया, मैया मैया मैया।

Reading 72 of 119 · Source no. 61 · Source PDF 130–132

1मोरिहुँ सुनु टुक मैया, मैया मैया मैया।

2तू अति भोरी भारी मैया,

3सीधी सादी मैया, मैया मैया मैया।

4लँगर कन्हैया तेरो मैया,

5पै न मान तू मैया, मैया मैया मैया।

6कालि गई रहि यमुना मैया,

7आय कन्हैया मैया, मैया मैया मैया।

8जल महँ लगी नहाने मैया,

9पट चुराय लिये मैया, मैया मैया मैया।

10लतन छुपाय दिये पट मैया,

11लखि न सक्यों हौं मैया, मैया मैया मैया।

12जल बाहर जब आई मैया,

13देखा पट नहिं मैया, मैया मैया मैया।

14बाहर खरो कन्हैया मैया,

15हँसत घूरि मोहिं मैया, मैया मैया मैया।

16हौं पूछी मम पट कहँ मैया,

17कह्यो कन्हैया मैया, मैया मैया मैया।

18आयो इक मोटो कपि मैया,

19लै गयो सखि पट मैया, मैया मैया मैया।

20जानि गयो यह कपि है मैया,

21तेरो ही सुत मैया, मैया मैया मैया।

22पुनि कह कहु प्रियतम मोहिं मैया,

23तब ला दउँ पट मैया, मैया मैया मैया।

24जब “कृपालु” प्रियतम कह मैया,

25दियो मोहिं पट मैया, मैया मैया मैया॥

26भावार्थ— किसी ब्रज-गोपी ने कृष्ण की चंचलता

27बतलाते हुए यशोदा से कहा- अरी मैया! कभी मेरी भी बात

28सुन लिया करो। तुम तो अत्यन्त ही भोली भाली और सीधी

29सादी हो। तुम्हारा पुत्र तुम्हारे स्वभाव को प्राप्त नहीं कर सका।

30कृष्ण तो अत्यन्त ही नटखट है, परन्तु तुम इस बात का कभी

31विश्वास नहीं करतीं। मैं कल यमुना-तट पर गई थी। वहाँ पर

32अचानक कृष्ण आ गया। मैं यमुना में प्रवेश कर स्नान करने

33लगी तो कृष्ण ने मेरे वस्त्र चुराकर लताओं में छिपा दिये। मुझे

34वस्त्र नहीं मिले। जब मैं जल से बाहर निकली तो तट पर मेरे

35वस्त्र नहीं थे। तट पर खड़ा हुआ कन्हैया मुझे घूर घूरकर देखकर

36हँसने लगा। जब मैंने पूछा- मेरे वस्त्र कहाँ हैं? तो बोला- एक

37मोटा बन्दर तुम्हारे वस्त्र ले गया। वह वानर यह कन्हैया ही

38था। फिर कहने लगा-मुझे अपना प्रियतम कह मैं वस्त्र लाकर

39दे दूँगा।“कृपालु”कहते हैं जब मैंने इसे “प्रियतम” कहा तब

40इसने मेरे वस्त्र लाकर दे दिये।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version