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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

सुनु रे कन्हैया कह मैया, मैया मैया मैया।

Reading 52 of 119 · Source no. 41 · Source PDF 92–94

1सुनु रे कन्हैया कह मैया, मैया मैया मैया।

2घर घर कर लँगरई कन्हैया,

3खीझी तोरी मैया, मैया मैया मैया।

4जाया कर तू पढ़न कन्हैया,

5कालिहिं ते सँग भैया, मैया मैया मैया।

6कहा पढ़ूँ मैं कहत कन्हैया,

7वेद पढ़हु कह मैया, मैया मैया मैया।

8वाको फल का कहत कन्हैया,

9ज्ञान मिले कह मैया, मैया मैया मैया।

10ज्ञान मिलइ केहि कहत कन्हैया,

11श्री हरि को कह मैया, मैया मैया मैया।

12ज्ञानहुँ फल का कहत कन्हैया,

13मिले भक्ति कह मैया, मैया मैया मैया।

14भक्तिहिं फल का कहत कन्हैया,

15मिले मोक्ष कह मैया, मैया मैया मैया।

16मोक्ष न चह हौं कहत कन्हैया,

17हौं जो चह सुनु मैया, मैया मैया मैया।

18सुनन चहत हौं कहत कन्हैया,

19गोपिन गारिन मैया, मैया मैया मैया।

20हम “कृपालु” भज तीनिहुँ मैया,

21गोपिन गोपन गैया, मैया मैया मैया।

22भावार्थ—माता यशोदा बालकृष्ण से कहती हैं- अरे

23कृष्ण! तुम गोपियों के घर-घर जाकर चंचलता करते हो मैं

24तुम्हारी शिकायतें सुन सुनकर अत्यन्त ही खीझ गई हूँ। कल से

25अपने दाऊ भैया के साथ पढऩे जाया करो। कृष्ण ने प्रश्न किया-

26मैं क्या पढ़ूँ? यशोदा बोलीं- वेद। कृष्ण ने पुनः प्रश्न किया-

27वेद पढ़ने का क्या फल प्राप्त होगा? माता यशोदा ने उत्तर

28दिया-वेद पढ़ने से ज्ञान की प्राप्ति होगी। कृष्ण ने प्रश्न किया-

29ज्ञान किसे कहते हैं? यशोदा बोलीं-ज्ञान श्री हरि का ही

30पर्यायवाची हैं। श्रीकृष्ण पूछते हैं-ज्ञान का क्या फल है? मैया

31उत्तर देती हैं- ज्ञान का फल भक्ति है! श्री कृष्ण ने पुनः प्रश्न

32किया- भक्ति से क्या फल प्राप्त होता है? माता यशोदा ने उत्तर

33दिया- भक्ति द्वारा कर्म बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है। श्रीकृष्ण

34बोले- मैं मुक्ति नहीं चाहता। मैं तो गोपियों की प्रेमपूर्ण गालियाँ

35ही सुनना चाहता हूँ। श्री कृष्ण माता यशाोदा से कहते हैं-मैं तो

36गोपियों, ग्वालों एवं गायों का ही स्मरण करता हूँ।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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