लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

निज घर चोरी कर कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

Reading 51 of 119 · Source no. 40 · Source PDF 90–92

1निज घर चोरी कर कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

2भोरो भारो वारो कान्हा,

3चलत घुटुरुवनि कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

4अवनि नवनि मटुकी लखि कान्हा,

5लार चुवत मुख कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

6लगे सोचने मन महँ कान्हा,

7है माखन मोहिं खाना, कान्हा कान्हा कान्हा।

8लख्यो चहूँ दिशि नटखट कान्हा,

9कोउ न दीख कहुँ कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

10मटुकिहिँ डारि दोउ कर कान्हा,

11खान लगे जब कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

12निज प्रतिबिम्ब खम्भ मणि कान्हा,

13देखि अपर शिशु जाना, कान्हा कान्हा कान्हा।

14यह भी चोर मोर सम जाना,

15पुनि वासों कह कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

16तुमहूँ चोर चोर हौं कान्हा,

17करि ले यारी कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

18ले आधो माखन कह कान्हा,

19इमि समुझावत कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

20पुनि प्रतिबिम्ब खवावत कान्हा,

21खात न कत कह कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

22आय अचानक मैया कान्हा,

23लखि भोरापन कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

24हौं “कृपालुहूँ” लीला कान्हा,

25मातु ओट लख कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

26भावार्थ—एक दिन नंदमहल में बालकृष्ण ने माखन-

27चोरी लीला की। भोले भाले छोटे से कृष्ण घुटनों के बल चलते

28हुए जहाँ मक्खन रखा था, उस स्थल पर पहुँच गये। मक्खन के

29पात्र को देखते ही माखन चोर के मुख में पानी भर आया।

30मक्खन के लोभी कृष्ण विचार करने लगे- आज तो अपने घर

31में ही चुराकर माखन खाना चहिये। चंचल कृष्ण ने इधर उधर

32दृष्टि दौड़ाई। कहीं कोई दिखाई न दिया। अब तो उनके मन

33की इच्छा पूरी हो गई। झट से माखन की मटुकी में हाथ डाल

34दिया। दोनों हाथों से शीघ्रतापूर्वक मक्खन खाने लगे। तभी

35अचानक मणि खम्भ पर दृष्टि पड़ गई। कृष्ण ने उसमें अपना

36प्रतिबिम्ब देखा। प्रतिबिम्ब को दूसरा गोप-बालक समझकर

37उसे भी अपने समान चोरी करते देख कृष्ण बोले- अरे मित्र!

38तुम भी चोर हो और मैं भी चोर; अतः हम दोनों की मित्रता

39पक्की हो गई। आधा माखन मैं खाऊँगा आधा तुझे दूँगा। अपने

40हाथ से जब नंदनंदन माखन का ग्रास प्रतिबिम्ब के मुख में

41डालने लगे तब उसे खाता न देख बोले- तू माखन खाता क्यों

42नहीं है? पीछे से अचानक यशोदा ने यह अद्भुत दृश्य देखा।

43“कृपालु”कहते हैं कि माता की ओट में छिपकर मैंने भी

44भोले भाले बाल गोपाल की इस माखन-चोरी -लीला का दर्शन

45किया।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version