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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

बाँधे मति ऊखल मैया, मैया मैया मैया।

Reading 48 of 119 · Source no. 37 · Source PDF 84–87

1बाँधे मति ऊखल मैया, मैया मैया मैया।

2तेरो सुत निर्दोष कन्हैया,

3ये सब झूठी मैया, मैया मैया मैया।

4मोहिं कह माखनचोर कन्हैया,

5नरक न डर इन मैया, मैया मैया मैया।

6सो कत माखन चोर कन्हैया,

7जेहि घर नव लख गैया, मैया मैया मैया।

8अति ऊँचो छींको इन मैया,

9छोटो तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।

10ये सब मोहिं बुलावति मैया,

11चलु घर मोर कन्हैया, मैया मैया मैया।

12पुनि कह मो गरीब घर मैया,

13टुक खा नवनि कन्हैया, मैया मैया मैया।

14जब जाऊँ तो ये सब मैया,

15घेरहिं तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।

16पुनि पुनि मोहिं नचावति मैया,

17का कर तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।

18नहिं नाचूँ तो मारें मैया,

19गुलचन गाल कन्हैया, मैया मैया मैया।

20कोउ कह दे दे मुकुट कन्हैया,

21कोउ कह मुरलिहिं मैया, मैया मैया मैया।

22कोउ कह दे नूपुरन कन्हैया,

23पीत वसन कोउ मैया, मैया मैया मैया।

24ये दो चार आठ नहिं मैया,

25जनु टिड्डी दल दैया, मैया मैया मैया।

26तू जाने यह तोर कन्हैया,

27भोरो भारो मैया, मैया मैया मैया।

28मिठ बोलनि उर विष इन मैया,

29साँचो कहत कन्हैया, मैया मैया मैया।

30सब कह पप्पी देउ कन्हैया,

31सब चूमति मुख मैया, मैया मैया मैया।

32पुनि पुनि धमकावति सब मैया,

33चलु ढिग मातु कन्हैया, मैया मैया मैया।

34निर्बल छोटो तोर कन्हैया,

35ये सब धींगरि मैया, मैया मैया मैया।

36तेरी सौंह खवावति मैया,

37कहु पुनि आउँ कन्हैया, मैया मैया मैया।

38जो न खाउँ तव सौंह जु मैया,

39आवन पावुँ न मैया, मैया मैया मैया।

40सौंह खाउँ तो जाऊँ मैया,

41सौंह उतारन मैया, मैया मैया मैया।

42आपुन सौंह कहत सच मैया,

43मानु मानु मम मैया, मैया मैया मैया।

44छाँड़ु “कृपालु” खात अब मैया,

45आपुनि सौंह कन्हैया, मैया मैया मैया।।

46भावार्थ— गोपियों के उलाहने सुनकर यशोदा मैया

47बालकृष्ण को ऊखल से बाँधने लगीं तब कन्हैया कहते हैं-

48अरी मैया! तू मुझे ऊखल से न बाँध। तेरा पुत्र निरपराध है।

49गोपियाँ झूठमूठ ही मेरी शिकायत किया करती हैं। ये तो भगवान्

50से भी नहीं डरती हैं। मुझे माखन चोर बताती हैं। जिसके घर में

51नौ लाख गायें हैं, वह गोपियों के घर माखन चुराने क्यों जायगा?

52इनका छींका जिस पर मक्खन रखा रहता है बहुत ऊँचा होता

53है। मैं तो बहुत छोटा हूँ पुनः मैं इनका मक्खन कैसे चुरा लूँगा?

54पहले तो ये सब मुझसे कहती हैं कि कन्हैया हमारे घर चलो।

55घर ले जाकर कहती हैं-मुझ गरीबिनी का भी मक्खन खा लो।

56सब की सब मुझे घेर कर नाचने को कहती हैं। बार बार मुझे

57नचाती हैं। मैं अकेला भला इनसे कैसे जीत सकता हूँ? यदि

58नहीं नाचता तो मेरे गाल में गुलचा मारती हैं। कोई गोपी मेरे

59सिर का मुकुट माँगती है, कोई मुरली, कोई मेरे पैरों के नूपुर

60एवं कोई पीताम्बर माँगती है। ये दो चार नहीं, टिड्डी दल के

61समान इनकी संख्या सीमित नहीं है। यशोदा से कन्हैया कहते

62हैं कि तू तो जानती ही है कि तेरा पुत्र अत्यन्त भोला भाला है।

63ये गोपियाँ मुख से तो मीठा बोलती हैं परन्तु इनके हृदय में विष

64भरा है। तुम्हारा कन्हैया कभी झूठ नहीं बोलता। सभी गोपियाँ

65मेरे मुख का चुम्बन करती हैं। तत्पश्चात् मुझे धमकी देती हैं

66कि आज मैया के निकट चलो तब तुम्हें बताऊँगी। गोपियाँ

67हृष्ट पुष्ट हैं। मैं तो दुबला पतला हूँ। दुबारा माता की सौगंध

68खिलाती हैं। यदि मैं तुम्हारी सौगंध न खाऊँ तो इनके घर से

69अपने घर भी नहीं आ सकता। यदि सौगंध खाता हूँ तो उसे

70उतारने के लिये दुबारा इनके घर जाना ही पड़ेगा। मैया मैं अपनी

71सौगन्ध खाता हूँ मैं जो कह रहा हूँ मेरी बात सच मान ले।

72“कृपालु” माता यशोदा से कहते हैं- मैया! कन्हैया अब अपनी

73सौगंध खा रहा है अतः अब इसे ऊखल से न बाँधो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version