# बाँधे मति ऊखल मैया, मैया मैया मैया।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-037
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 84–87



<a id="line-1"></a>बाँधे मति ऊखल मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-2"></a>तेरो सुत निर्दोष कन्हैया,  
<a id="line-3"></a>ये सब झूठी मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-4"></a>मोहिं कह माखनचोर कन्हैया,  
<a id="line-5"></a>नरक न डर इन मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-6"></a>सो कत माखन चोर कन्हैया,  
<a id="line-7"></a>जेहि घर नव लख गैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-8"></a>अति ऊँचो छींको इन मैया,  
<a id="line-9"></a>छोटो तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-10"></a>ये सब मोहिं बुलावति मैया,  
<a id="line-11"></a>चलु घर मोर कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-12"></a>पुनि कह मो गरीब घर मैया,  
<a id="line-13"></a>टुक खा नवनि कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-14"></a>जब जाऊँ तो ये सब मैया,  
<a id="line-15"></a>घेरहिं तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-16"></a>पुनि पुनि मोहिं नचावति मैया,  
<a id="line-17"></a>का कर तोर कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-18"></a>नहिं नाचूँ तो मारें मैया,

<a id="line-19"></a>गुलचन गाल कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-20"></a>कोउ कह दे दे मुकुट कन्हैया,  
<a id="line-21"></a>कोउ कह मुरलिहिं मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-22"></a>कोउ कह दे नूपुरन कन्हैया,  
<a id="line-23"></a>पीत वसन कोउ मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-24"></a>ये दो चार आठ नहिं मैया,  
<a id="line-25"></a>जनु टिड्डी दल दैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-26"></a>तू जाने यह तोर कन्हैया,  
<a id="line-27"></a>भोरो भारो मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-28"></a>मिठ बोलनि उर विष इन मैया,  
<a id="line-29"></a>साँचो कहत कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-30"></a>सब कह पप्पी देउ कन्हैया,  
<a id="line-31"></a>सब चूमति मुख मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-32"></a>पुनि पुनि धमकावति सब मैया,  
<a id="line-33"></a>चलु ढिग मातु कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-34"></a>निर्बल छोटो तोर कन्हैया,  
<a id="line-35"></a>ये सब धींगरि मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-36"></a>तेरी सौंह खवावति मैया,  
<a id="line-37"></a>कहु पुनि आउँ कन्हैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-38"></a>जो न खाउँ तव सौंह जु मैया,  
<a id="line-39"></a>आवन पावुँ न मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-40"></a>सौंह खाउँ तो जाऊँ मैया,  
<a id="line-41"></a>सौंह उतारन मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-42"></a>आपुन सौंह कहत सच मैया,  
<a id="line-43"></a>मानु मानु मम मैया, मैया मैया मैया।

<a id="line-44"></a>छाँड़ु “कृपालु” खात अब मैया,  
<a id="line-45"></a>आपुनि सौंह कन्हैया, मैया मैया मैया।।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-46"></a>भावार्थ— गोपियों के उलाहने सुनकर यशोदा मैया  
<a id="line-47"></a>बालकृष्ण को ऊखल से बाँधने लगीं तब कन्हैया कहते हैं-  
<a id="line-48"></a>अरी मैया! तू मुझे ऊखल से न बाँध। तेरा पुत्र निरपराध है।  
<a id="line-49"></a>गोपियाँ झूठमूठ ही मेरी शिकायत किया करती हैं। ये तो भगवान्  
<a id="line-50"></a>से भी नहीं डरती हैं। मुझे माखन चोर बताती हैं। जिसके घर में  
<a id="line-51"></a>नौ लाख गायें हैं, वह गोपियों के घर माखन चुराने क्यों जायगा?  
<a id="line-52"></a>इनका छींका जिस पर मक्खन रखा रहता है बहुत ऊँचा होता  
<a id="line-53"></a>है। मैं तो बहुत छोटा हूँ पुनः मैं इनका मक्खन कैसे चुरा लूँगा?  
<a id="line-54"></a>पहले तो ये सब मुझसे कहती हैं कि कन्हैया हमारे घर चलो।  
<a id="line-55"></a>घर ले जाकर कहती हैं-मुझ गरीबिनी का भी मक्खन खा लो।  
<a id="line-56"></a>सब की सब मुझे घेर कर नाचने को कहती हैं। बार बार मुझे  
<a id="line-57"></a>नचाती हैं। मैं अकेला भला इनसे कैसे जीत सकता हूँ? यदि  
<a id="line-58"></a>नहीं नाचता तो मेरे गाल में गुलचा मारती हैं। कोई गोपी मेरे  
<a id="line-59"></a>सिर का मुकुट माँगती है, कोई मुरली, कोई मेरे पैरों के नूपुर  
<a id="line-60"></a>एवं कोई पीताम्बर माँगती है। ये दो चार नहीं, टिड्डी दल के  
<a id="line-61"></a>समान इनकी संख्या सीमित नहीं है। यशोदा से कन्हैया कहते  
<a id="line-62"></a>हैं कि तू तो जानती ही है कि तेरा पुत्र अत्यन्त भोला भाला है।  
<a id="line-63"></a>ये गोपियाँ मुख से तो मीठा बोलती हैं परन्तु इनके हृदय में विष  
<a id="line-64"></a>भरा है। तुम्हारा कन्हैया कभी झूठ नहीं बोलता। सभी गोपियाँ  
<a id="line-65"></a>मेरे मुख का चुम्बन करती हैं। तत्पश्चात् मुझे धमकी देती हैं

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-66"></a>कि आज मैया के निकट चलो तब तुम्हें बताऊँगी। गोपियाँ  
<a id="line-67"></a>हृष्ट पुष्ट हैं। मैं तो दुबला पतला हूँ। दुबारा माता की सौगंध  
<a id="line-68"></a>खिलाती हैं। यदि मैं तुम्हारी सौगंध न खाऊँ तो इनके घर से  
<a id="line-69"></a>अपने घर भी नहीं आ सकता। यदि सौगंध खाता हूँ तो उसे  
<a id="line-70"></a>उतारने के लिये दुबारा इनके घर जाना ही पड़ेगा। मैया मैं अपनी  
<a id="line-71"></a>सौगन्ध खाता हूँ मैं जो कह रहा हूँ मेरी बात सच मान ले।  
<a id="line-72"></a>“कृपालु” माता यशोदा से कहते हैं- मैया! कन्हैया अब अपनी  
<a id="line-73"></a>सौगंध खा रहा है अतः अब इसे ऊखल से न बाँधो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
