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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

तुम ते न कम हम सुनु बनवारी,

Reading 33 of 119 · Source no. 22 · Source PDF 55–57

1तुम ते न कम हम सुनु बनवारी,

2हम तुम दोउ ही हैं सम बनवारी।

3तुम भी हो अज अनादि बनवारी,

4हम भी हैं अज अनादि बनवारी।

5तुम भी हो चित चेतन बनवारी,

6हम भी हैं चित चेतन बनवारी।

7तुम भी हो अति निर्मल बनवारी,

8हम भी हैं अति निर्मल बनवारी।

9तुम भी हो नित्य सखा बनवारी,

10हम भी हैं नित्य सखा बनवारी।

11तुम भी रहहु उर पुर बनवारी,

12हम भी रहहिँ उर पुर बनवारी।

13तुम भी हो मन बुधि पर बनवारी,

14हम भी हैं मन बुधि पर बनवारी।

15तुम भी हो व्यापक जग बनवारी,

16हम भी हैं व्यापक तनु बनवारी।

17तुम भी हो सनातन बनवारी,

18हम भी हैं सनातन बनवारी।

19तुम भी हो आनँदघन बनवारी,

20हम भी हैं आनँद कन बनवारी।

21तुम भी हो मायायुत बनवारी,

22हम भी हैं मायायुत बनवारी।

23भेद तू मायापति बनवारी,

24हौँ “कृपालु” मायिक बनवारी॥

25भावार्थ—एक जीवात्मा अपने नित्य सखा श्यामसुन्दर

26से विचित्र ढंग से कह रही है- हे बनवारी! हम तुमसे किसी

27प्रकार से भी कम नहीं है। हम और तुम एक समान ही हैं। तुम

28अज और अनादि हो तो हमारा भी कभी जन्म नहीं हुआ। हम

29भी अनादिकाल से हैं। तुम चैतन्य एवं ज्ञान स्वरूप हो। तुम्हारा

30अंश होने के कारण मैं भी चित् चेतन स्वरूप हूँ। तुम अत्यन्त

31पवित्र हो तो मैं भी तुम्हारे समान ही अमल हूँ। हम तुम परस्पर

32नित्य सखा हैं-““द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया----””तुम परमात्मा

33होने से सबके हृदय में वास करते हो, मैं जीवात्मा भी हृदय में

34ही रहता हूँ। तुम भगवान् होने के कारण मन बुद्धि से अतीत हो

35तो मैं भी जीवात्मा होने से मन-बुद्धि द्वारा ग्राह्य नहीं। तुम

36सम्पूर्ण विश्व में व्यापक हो, मैं शरीर में व्यापक हूँ। तुम सनातन

37हो तो मैं भी सनातन हूँ।““ममैवांशो--- जीवभूतः सनातनः।””

38तुम आनन्दघन रूप हो तो मैं जीव भी आनन्दरूप ही हूँ। तुम

39मायायुत हो, मैं भी मायायुत हूँ अन्तर इतना ही है कि तुम

40मायाधीश हो और मैं मायाधीन हूँ।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version