Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
धन धन गोपीजन प्रेमधन धन धन,
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1धन धन गोपीजन प्रेमधन धन धन,
2धन धन त्रिभुवन गोपीजन धन धन।
3जेहि श्रुति कह अज सत चित सुख घन,
4सोइ बन्यो ब्रज यशुमति नँदनंदन।
5जेहि श्रुति कह निर्लेप निरंजन,
6सोइ बन्यो ब्रज ब्रजबनितन अंजन।
7जेहि श्रुति कह नित तृप्त नँदनंदन,
8सोइ रो के कहे मैया दे दे टुक माखन।
9जेहि श्रुति कह पूर्णकाम नँदनंदन,
10सोइ करे रास ब्रज सँग ब्रज बनितन।
11श्रुति कह डरे डर डर नँदनंदन,
12सोइ जरासंध भय भाज्यो भयभंजन।
13जेहि श्रुति कह पूर्णब्रह्म नँदनंदन,
14सोइ नाचे छाछ हित ब्रज ढिग गोपीजन।
15जेहि श्रुति कह सर्वज्ञ नँदनंदन,
16सोइ पढ़े उज्जयन क ख ग घ अक्षरन।
17श्रुति कह जग चालक नँदनंदन,
18सोइ सीखे चलनो यशोमति आँगन।
19जेहि कर श्रुति अस्तुति नँदनंदन,
20सोइ गारी खाने जाय घर ब्रज गोपीजन।
21जेहि कह श्रुति अग्राह्य नँदनंदन,
22सोइ बँध्यो ऊखल यशुमति आँगन।
23जेहि कह श्रुति हैं “कृपालु” नँदनंदन,
24सोइ कृपा माँगे आगे राधा गहवर वन॥
25भावार्थ—ब्रज-गोपियों का प्रेम धन्य है। तीनों लोकों
26में ब्रज-गोपियों का प्रेम धन्य है। तीनों लोकों में ब्रज-गोपियों
27का जीवन ही धन्य है। जिसको वेद अज एवं सत् चित् सुखघन
28स्वरूप कहता है वही ब्रह्म ब्रज में यशोदा और नंद का पुत्र
29बना। जिसे वेद निर्लेप और निरंजन कहता है वही ब्रज में
30ब्रजगोपियों के नेत्रों का अंजन बन गया। वेद जिसे नित्यतृप्त
31कहता है वह यशोदा से रोकर मक्खन माँगता है। जिसे वेद
32पूर्णकाम बतलाता है वही ब्रजमंडल में गोपियों के साथ रास-
33विहार करता है। वेद कहता है कि श्री कृष्ण के भय से भय भी
34भयभीत होता है वही भय को नष्ट करने वाले कृष्ण जरासंध
35के भय से भागकर द्वारिका के किले में छिपे। जिसे वेद पूर्णब्रह्म
36कहता है वही नंदपुत्र कृष्ण ब्रज में किंचित् छाछ के हेतु गोपियों
37के घरों में नृत्य कर रहा है। जिसे वेद सर्वज्ञ कहता है, वही
38उज्ज्ौन में जाकर गुरु के निकट क ख ग आदि अक्षर पढ़ रहा
39है। वेद कहता है कि श्री कृष्ण सारे जग को चलाते हैं। वही
40कृष्ण यशोदा के आंगन में चलना सीख रहा है। वेद जिन श्री
41कृष्ण की स्तुति करता है। वे ही कृष्ण गाली खाने के लिये
42गोपियों के घर जाते हैं। जिन श्री कृष्ण को वेद अग्राह्य कहता
43है वही दामोदर यशोदा के आँगन में ऊखल से बँधे हुए खड़े
44हैं। जिसे वेद कृपालु बताता है वहीं कृष्ण गह्वरवन में श्री राधा
45से कृपा की याचना करते हैं।