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Yugal Madhuri

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरो प्रियतम कुंज बिहारी, तन मन धन उन पर वारी।

Reading 26 of 75 · Source no. 15 · Source PDF 56–57

1(मेरो राधारमण गिरिधारी)

2मेरो प्रियतम कुंज बिहारी, तन मन धन उन पर वारी।

3मेरो प्राण प्राण बनवारी, विहरत नित संग बिहारी।

4मम पिय बनि गयो बनवारी, मैं बनि गइ उनकी प्यारी।

5वे वृन्दाविपिन बिहारी, ह्वै गइ उनतेइ मम यारी।

6लिए मधुर भाव उर धारी, किये यार निकुंज बिहारी।

7हमरिहुँ सुधि लो बनवारी, रिरियात पतित बनवारी।

8मन सुनत न नेकु हमारी, तुम सुनु “कृपालु” बनवारी।

9तू ही तो मम बनवारी, पुनि काहे मोहिँ बिसारी।

10नहिं चहत पदारथ चारी, हौं तो हौं प्रेम भिखारी।

11याचत भइ बेर बिहारी, अब तो सुनु टेर हमारी।

12आयो हौं शरण तिहारी, पुरवहु मम आस मुरारी।

13हौं परम पतित गिरिधारी, तुम हो पतितन हितकारी।

14नहिं चहहुँ न्याय बनवारी, चह कृपा “कृपालु” तिहारी।

Original Hindi songs from the supplied standalone Yugal Madhuri edition. This is distinct from Prem Ras Madira's similarly named chapter. Frontmatter retains its own source credits. Supplied edition: Fifth edition, Gita Jayanti, 28 November 2009.

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