Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
रति रस सागर सब गुन आगर,
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2रति रस सागर सब गुन आगर,
3नटवर नागर श्याम रे।
4रसिक रँगीले गुन गरबीले,
5छैल छबीले श्याम रे।
6चिन्मय नीले तनु पट पीले,
7ही ले धरि वसुयाम रे।
8सरस रसीले नैन नुकीले,
9कीले मन ब्रजबाम रे।
10नन्द-दुलारे गोपिन-प्यारे,
11मुरली वारे श्याम रे।
12नैनन तारे प्राण हमारे,
13कामरि वारे श्याम रे।
14नित नव रंगी गोपन संगी,
15ललित त्रिभंगी श्याम रे।
16काम विमोहन निज मनमोहन,
17मो मन मोहन श्याम रे।
18जन मन रंजन भव भय भंजन,
19अरि मदगंजन श्याम रे।
20यशुमति नन्दन कंस निकन्दन,
21त्रिभुवन वंदन श्याम रे।
22सुघर सलोना नंद डुठौना,
23को ना चह ब्रजबाम रे।
24दधि घट फोरे उर लर तोरे,
25कह “कृपालु” अस श्याम रे।