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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

सत्संग–कुसंग · पृष्ठ 945

Reading 441 of 452 · Source nos. 10984–10995 · Source PDF 448

1मन का नित्य संग गोविंद राधे।

2हरि गुरु दोनों में ही रहे बता दे॥ 10984॥

3सन्त का संग जैसे गोविंद राधे।

4अनंत पापों का नाश करा दे॥ 10985॥

5वैसे असन्त संग गोविंद राधे।

6जीव ते अनंत पातक करवा दे॥ 10986॥

7काम क्रोधादि पूर्व गोविंद राधे।

8आते हैं तरंग सम सूक्ष्म बता दे॥ 10987॥

9पाके कुसंग दोष गोविंद राधे।

10बन जाते हैं समुद्र ज्यों बता दे॥ 10988॥

11इष्ट गुरु कथा सुने गोविंद राधे।

12और कछु सुनना कुसंग बता दे॥ 10989॥

13कोई महात्मा भी गोविंद राधे।

14भक्ति का विरोधी हो कुसंग बता दे॥ 10990॥

15कोई सिद्ध योगी भी गोविंद राधे।

16भक्ति का विरोधी हो कुसंग बता दे॥ 10991॥

17कोई ब्रह्मज्ञानी भी गोविंद राधे।

18भक्ति का विरोधी हो कुसंग बता दे॥ 10992॥

19निज गुरु हरि भक्ति गोविंद राधे।

20तीनों का विरोधी कुसंग बता दे॥ 10993॥

21किसी भी स्थान में गोविंद राधे।

22मिले जो कुसंग करो त्याग बता दे॥ 10994॥

23किसी भी काल में गोविंद राधे।

24मिले जो कुसंग करो त्याग बता दे॥ 10995॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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