Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 937
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1बड़े अपराध तीन गोविंद राधे।
2भक्ति भक्त भगवान प्रति हैं बता दे॥ 10916॥
3भक्ति अपराधन गोविंद राधे।
4भगवान अपराध भक्त क्षमा दे॥ 10917॥
5किन्तु भक्त अपराध गोविंद राधे।
6भक्ति या भगवान दोनों ना क्षमा दे॥ 10918॥
7कृष्ण भक्त निन्दा ज्यों गोविंद राधे।
8करना है नामापराध बता दे॥ 10919॥
9कृष्ण भक्त निन्दा त्यों गोविंद राधे।
10सुनना भी नामापराध बता दे॥ 10920॥
11निन्दाकर्ता श्रोता गोविंद राधे।
12दोनों जायें साथ साथ नरक बता दे॥ 10921॥
13नामापराध का तो गोविंद राधे।
14प्रायश्चित नहिं वेद में बता दे॥ 10922॥
15नाम मन भाया गावो गोविंद राधे।
16मैया कह लाला ग्वाल कनुआ बुला दे॥ 10923॥
17रसना ते गावो नित गोविंद राधे।
18मन ते मिलन व्याकुलता बढ़ा दे॥ 10924॥
19नाम गाओ या ना गाओ गोविंद राधे।
20मिलन की अति व्याकुलता बढ़ा दे॥ 10925॥
21प्रेम भिक्षां देहि गोविंद राधे।
22प्रेम पात्र मन को तो शुद्ध करा दे॥ 10926॥
23हरि गुरु हित यदि गोविंद राधे।
24मन पिघले तो मन शुद्ध करा दे॥ 10927॥