Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 936
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1नाम अपराध ऐसा गोविंद राधे।
2भाव भक्ति पा के भी पतन करा दे॥ 10904॥
3नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
4कर्म योग ज्ञान भक्ति सब को नसा दे॥ 10905॥
5नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
6भगवान ते भी हो असह्य बता दे॥ 10906॥
7नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
8दुर्वासा से ज्ञानी पै चक्र चला दे॥ 10907॥
9नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
10जैसा अपराध नहिं वेद बता दे॥ 10908॥
11नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
12ज्ञानी योगी भक्त का भी पतन करा दे॥ 10909॥
13नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
14ऋद्धि सिद्धि निधि को भी धूल में मिला दे॥ 10910॥
15भक्त यदि कर्म ते गोविंद राधे।
16प्रीति करे नामापराध बता दे॥ 10911॥
17भक्त यदि ज्ञान ते गोविंद राधे।
18प्रीति करे नामापराध बता दे॥ 10912॥
19भक्त यदि योग ते गोविंद राधे।
20प्रीति करे नामापराध बता दे॥ 10913॥
21भक्त प्रति यदि करे गोविंद राधे।
22दुर्भाव नामापराध बता दे॥ 10914॥
23तो शत शत जन्म गोविंद राधे।
24करे हरिभक्ति सब व्यर्थ बता दे॥ 10915॥