Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 935
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1याते विवेकी पूर्व गोविंद राधे।
2कुत्ता निकाले पुनि पानी बता दे॥ 10892॥
3ऐसे ही मन को गोविंद राधे।
4निरपराध करि हरि में लगा दे॥ 10893॥
5नाम में हैं सर्व शक्ति गोविंद राधे।
6दुर्दैववश विश्वास ना बता दे॥ 10894॥
7“दुर्दैव” अर्थ यह गोविंद राधे।
8नाम अपराध नाम फल को नसा दे॥ 10895॥
9सब ते बड़ी है हानि गोविंद राधे।
10नामापराधी का संग बता दे॥ 10896॥
11नामापराध दस गोविंद राधे।
12हरि अरु हरिजन निंदा बता दे॥ 10897॥
13हरिनाम अोट पाप गोविंद राधे।
14अवतारों में भेद भाव भी बता दे॥ 10898॥
15हरि नाम अर्थवाद गोविंद राधे।
16कर्मादि ते नाम तुलना बता दे॥ 10899॥
17नाम में शंका गोविंद राधे।
18नाम लेने में असावधानी बता दे॥ 10900॥
19वेदों की निंदा अरु गोविंद राधे।
20श्रद्धाहीन को उपदेश बता दे॥ 10901॥
21नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
22साधकों की साधना को शून्य बना दे॥ 10902॥
23नामापराध ऐसा गोविंद राधे।
24उच्च साधकों का भी पतन करा दे॥ 10903॥