Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 933
Reading 430 of 452 · Source nos. 10868–10879 · Source PDF 436
1नल नील लै के राम गोविंद राधे।
2पुल बाँधा सिन्धु नाम सिन्धु को सुखा दे॥ 10868॥
3नाम पिता सुता मन गोविंद राधे।
4नामी पति पिता सुता योग्य बना दे॥ 10869॥
5नामी मिले भक्तों को गोविंद राधे।
6नाम मिले पतितों को सबको बता दे॥ 10870॥
7नामी मिले मंदिर गोविंद राधे।
8नाम मिले सर्वत्र दाम कछु ना दे॥ 10871॥
9नामी मिले दिव्य धाम गोविंद राधे।
10नाम मिले मायाधाम धन्यवाद का दे॥ 10872॥
11नामी चाहे पूजा सेवा गोविंद राधे।
12नाम चाहे अनुरागयुक्त नाम गा दे॥ 10873॥
13कामना नसाना चाहो गोविंद राधे।
14उलटा करो अवलम्ब लो बता दे॥ 10874॥
15श्रद्धा भक्ति हीन भी गोविंद राधे।
16नाम सब पाप नाशे शंकर बता दे॥ 10875॥
17पापी कोटि पाप करे गोविंद राधे।
18नाम सुमिरन निष्पाप बना दे॥ 10876॥
19पाप के नाश हित गोविंद राधे।
20हरि नाम गुण लीला कीर्तन करा दे॥ 10877॥
21नाम में है हरि रस गोविंद राधे।
22नाम गाते रहो रस मिलेगा बता दे॥ 10878॥
23हरि नाम पाप नासे गोविंद राधे।
24कटे पाप तब रस आये बता दे॥ 10879॥