Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 932
Reading 429 of 452 · Source nos. 10856–10867 · Source PDF 435
1नमयति इति नाम गोविंद राधे।
2साधक साध्य को नाम झुका दे॥ 10856॥
3नाम रूप एक ही गोविंद राधे।
4फिर भी बड़ा है नाम रूप ते बता दे॥ 10857॥
5नाम ले पुकारो तो गोविंद राधे।
6रूप भागा भागा आपु आवे बता दे॥ 10858॥
7गजराज आर्त ही था गोविंद राधे।
8नाम लै पुकारा वाको ग्राह ते छुड़ा दे॥ 10859॥
9द्रौपदी सकाम ही थी गोविंद राधे।
10नाम लै पुकारा वाको अंबर बढ़ा दे॥ 10860॥
11प्रह्लाद सच्चा प्रेमी गोविंद राधे।
12बिनु ही पुकारे वाय आग ते बचा दे॥ 10861॥
13मीरा ने नाम जपा गोविंद राधे।
14बिनु ही कहे वाको विष ते बचा दे॥ 10862॥
15शबरी ने नाम जपा गोविंद राधे।
16जूठे बेर खाके नाम महिमा बढ़ा दे॥ 10863॥
17गोपियों ने नाम जपा गोविंद राधे।
18नामी पाछे घूमे कहे छाछ पिला दे॥ 10864॥
19नाम नामी भेद यही गोविंद राधे।
20सबते बड़ा ब्रह्म नाम छोटा बना दे॥ 10865॥
21राम ने अहिल्या तारी गोविंद राधे।
22नाम कोटि पतितन पावन बना दे॥ 10866॥
23राम ने गरुड़ मोहा गोविंद राधे।
24नाम अज्ञानियों का मोह भगा दे॥ 10867॥