Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 926
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1मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
2श्याम तनु में श्यामा तनु को समा दे॥ 10784॥
3मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
4हरि गुरु दोनों खड़े गरबँहियाँ दे॥ 10785॥
5मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
6हरि गुरु चरणों में सिर को झुका दे॥ 10786॥
7मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
8हे हरि गुरु मोहिं रास दिखा दे॥ 10787॥
9मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
10गुरु तनु में श्याम तनु को समा दे॥ 10788॥
11मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
12प्रेम हित गुरु पद आँसू बहा दे॥ 10789॥
13प्रभु ध्यान ऐसा करु गोविंद राधे।
14उर ते लगाया नाहिं काहे बता दे॥ 10790॥
15जीव लक्ष्य कृष्ण का गोविंद राधे।
16स्मरण श्रवण अरु कीर्तन बता दे॥ 10791॥
17अनदेखे की प्रीति गोविंद राधे।
18कर्ण ते श्रवण द्वारा उर हो बता दे॥ 10792॥
19श्याम बड़े कौतुकी हैं गोविंद राधे।
20अपना गुणगान सुनें ध्यान ते बता दे॥ 10793॥
21श्रवण अरु कीर्तन गोविंद राधे।
22तीन प्रकार का होता है बता दे॥ 10794॥
23प्रथम तो है हरि का गोविंद राधे।
24रूप श्रवण अरु कीर्तन बता दे॥ 10795॥