Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 925
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1हरि श्री अंगों के गोविंद राधे।
2जग उपमान सब व्यर्थ हैं बता दे॥ 10772॥
3फिर भी प्रारम्भ में तो गोविंद राधे।
4साधक को हो सहायता बता दे॥ 10773॥
5मन जब दिव्य बने गोविंद राधे।
6तब हरि निज दिव्य रूप दिखा दे॥ 10774॥
7भक्त भावाधीन गोविंद राधे।
8सगुण साकार भगवान हैं बता दे॥ 10775॥
9भक्त जैसा चाहे गोविंद राधे।
10भगवान वैसा ही रूप बना दे॥ 10776॥
11हरि का स्मरण जो भी गोविंद राधे।
12करे नित्य वाको हरि सुलभ बता दे॥ 10777॥
13श्यामा श्याम नाम गा ले गोविंद राधे।
14मन ते लगा ले ध्यान जग तोहिं का दे॥ 10778॥
15श्यामा श्याम रूपध्यान गोविंद राधे।
16नाम गुण गान दिव्य प्रेम दिला दे॥ 10779॥
17मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
18श्यामा श्याम आगे खड़े गरबँहियाँ दे॥ 10780॥
19मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
20श्याम कह रहे हैं श्यामा मोहिं सेवा दे॥ 10781॥
21मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
22श्यामा पौढ़ीं सेज श्याम चरण दबा दे॥ 10782॥
23मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।
24श्यामा तनु में श्याम तनु को समा दे॥ 10783॥