Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 924
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1जो विष्णु मूर्ति में गोविंद राधे।
2शिलाबुद्धि करे जाय नरक बता दे॥ 10760॥
3जो हरिनाम में गोविंद राधे।
4करे शब्द बुद्धि जाये नरक बता दे॥ 10761॥
5जो गुरुदेव में गोविंद राधे।
6करे नर बुद्धि जाये नरक बता दे॥ 10762॥
7हरि की पूजा करे गोविंद राधे।
8भक्त को न पूजे वह भक्त ना बता दे॥ 10763॥
9मन की स्थिरता हित गोविंद राधे।
10हरि रूप लीला का ध्यान करा दे॥ 10764॥
11कृष्ण रूप, गुण, लीला गोविंद राधे।
12हैं स्वरूप शक्ति के विलास बता दे॥ 10765॥
13जीव जड़ जंगम गोविंद राधे।
14धाम, वस्तु, लीला, परिकर बता दे॥ 10766॥
15सब ही हैं कृष्ण शक्ति गोविंद राधे।
16सम्बन्ध शक्ति शक्तिमान का बता दे॥ 10767॥
17कस्तूरी अरु गंध गोविंद राधे।
18दोनों में भेदाभेद दुष्कर बता दे॥ 10768॥
19शक्ति शक्तिमान में तो गोविंद राधे।
20भेद अभेद एक साथ है बता दे॥ 10769॥
21दिव्य तनु दिव्य गुण गोविंद राधे।
22युक्त रूपध्यान मन चाहा बना दे॥ 10770॥
23हरि शृंगार आदि गोविंद राधे।
24भक्त जैसा चाहे वैसा करा दे॥ 10771॥