Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 923
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1“आसीनः संभवात्” गोविंद राधे।
2सूत्र कह बैठि मन हरि में लगा दे॥ 10748॥
3“ध्यानाच्च” ब्रह्मसूत्र गोविंद राधे।
4भावार्थ श्यामा श्याम ध्यान करा दे॥ 10749॥
5“अचलत्वं चापेक्ष्य” गोविंद राधे।
6सूत्र कह सावधान बैठे बता दे॥ 10750॥
7“स्मरति च” ब्रह्म सूत्र गोविंद राधे।
8स्थिर बैठि मन श्यामा श्याम में लगा दे॥ 10751॥
9“यत्रैकाग्रतादि” सूत्र गोविंद राधे।
10कह देश काल का ना नियम बता दे॥ 10752॥
11“आप्रयणात्” सूत्र गोविंद राधे।
12कह मृत्युपर्यन्त भक्ति करा दे॥ 10753॥
13वाणी ते कीर्तन गोविंद राधे।
14कर्ण ते श्रवण मन ध्यान करा दे॥ 10754॥
15युगल, रूप, गुण, लीला गोविंद राधे।
16मन ते चिन्तन ध्यान बता दे॥ 10755॥
17भक्त संग कृष्ण सेवा गोविंद राधे।
18तीसरा है भागवत श्रवण बता दे॥ 10756॥
19चौथा नाम कीर्तन गोविंद राधे।
20पाचवाँ वृन्दावन वास बता दे॥ 10757॥
21इन पाँचों का ही गोविंद राधे।
22श्रद्धा युक्त मन ते सेवन करा दे॥ 10758॥
23पद्मपुराण में तो गोविंद राधे।
24वेदव्यास ने कहा है बता दे॥ 10759॥