Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संकीर्तन · पृष्ठ 922
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1द्वापर का सोई कर्म गोविंद राधे।
2एक मास में ही फल दे दे बता दे॥ 10736॥
3कलि का तो सोई कर्म गोविंद राधे।
4एक दिन रात में ही फल दे बता दे॥ 10737॥
5कलि कर्म ज्ञान नहिं गोविंद राधे।
6हरिनाम कीर्तन साध्य दिला दे॥ 10738॥
7कलि सम युग नहिं गोविंद राधे।
8हरि नाम हरि ध्यान हरि ते मिला दे॥ 10739॥
9कलि सर्व दोष खानि गोविंद राधे।
10गुण कृष्ण कीर्तन हरि ते मिला दे॥ 10740॥
11जप हो या कीर्तन गोविंद राधे।
12रूपध्यान भी हो योगदर्शन बता दे॥ 10741॥
13जग में भी काहु को गोविंद राधे।
14पूर्व रूपध्यान पाछे नाम ले बता दे॥ 10742॥
15पहले बुलावो हरि गोविंद राधे।
16पाछे हरि नाम, गुण, लीला सुना दे॥ 10743॥
17नाम तो गाया किन्तु गोविंद राधे।
18नामी को भुलाया याते नामी भुला दे॥ 10744॥
19मन रूपध्यान करे गोविंद राधे।
20कृपा माँगे प्रेम निष्काम दिला दे॥ 10745॥
21रसना ते हरि बोल गोविंद राधे।
22श्याम गौर रस घोल मन को पिला दे॥ 10746॥
23रसना ते ही जनि गोविंद राधे।
24बोल राधे साथ रूपध्यान करा दे॥ 10747॥