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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 914

Reading 412 of 452 · Source nos. 10666–10677 · Source PDF 417

1जन्म तो गोपियों का गोविंद राधे।

2और जन्म तो हैं व्यर्थ बता दे॥ 10666॥

3ये सब गोपियाँ तो गोविंद राधे।

4महाभाव प्रेम ते युक्त हैं बता दे॥ 10667॥

5बड़े बड़े जीवन्मुक्त गोविंद राधे।

6गोपियों सा प्रेम नहिं पायें बता दे॥ 10668॥

7जिन्हें इस रस का गोविंद राधे।

8चसका लग गया कबहूँ बता दे॥ 10669॥

9उसे योग ज्ञान की गोविंद राधे।

10क्या है आवश्यकता बता दे॥ 10670॥

11जिसे यह प्रेम रस गोविंद राधे।

12गोपी जनों सा मिला ना बता दे॥ 10671॥

13यदि वह कल्प लौं गोविंद राधे।

14ब्रह्मा पद पाये तो व्यर्थ बता दे॥ 10672॥

15कहाँ गमार ग्वालिनें गोविंद राधे।

16कहाँ परब्रह्म श्रीकृष्ण बता दे॥ 10673॥

17फिर भी अनन्य प्रेम गोविंद राधे।

18गोपियों का आश्चर्य बता दे॥ 10674॥

19सर्व स्वतंत्र कृष्ण गोविंद राधे।

20गोपियों के बने दास बता दे॥ 10675॥

21कृष्ण स्वरूप को जो गोविंद राधे।

22बिनु जाने भी करें प्यार बता दे॥ 10676॥

23उनको भी श्रीकृष्ण गोविंद राधे।

24ज्ञान करायें अपना बता दे॥ 10677॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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