Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 913
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1आओ बचाओ ब्रज गोविंद राधे।
2शोक में डूबा जा रहा बता दे॥ 10654॥
3प्रिय संदेश कहि गोविंद राधे।
4गोपियाँ हो गइँ शान्त बता दे॥ 10655॥
5ऊधो भी ब्रज में गोविंद राधे।
6कई महीने रहे प्रेम ते बता दे॥ 10656॥
7ऊधो गये भूलि गोविंद राधे।
8अपना योग ज्ञान ध्यान बता दे॥ 10657॥
9गोपीभावयुक्त गोविंद राधे।
10कृष्णप्रेम में भये मग्न बता दे॥ 10658॥
11आये थे गुरु बनि गोविंद राधे।
12बनि गये शिष्य गोपियों के बता दे॥ 10659॥
13ऊधो कभू जाते गोविंद राधे।
14यमुना के तट पै रोते बता दे॥ 10660॥
15कभू मंजु कुंजों में गोविंद राधे।
16लीला स्मरण करते थे बता दे॥ 10661॥
17कभू ब्रज वृक्षों ते गोविंद राधे।
18लिपट कर रोते थे बता दे॥ 10662॥
19कभू “हा कृष्ण” कहि गोविंद राधे।
20मुर्छित गिरते क्षिति पै बता दे॥ 10663॥
21ऊधो ने गोपियों को गोविंद राधे।
22तन मन ते किया नमन बता दे॥ 10664॥
23पुनि कहा धन्य गोपी गोविंद राधे।
24धन्य गोपी प्रेम बलिहार बता दे॥ 10665॥