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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 912

Reading 410 of 452 · Source nos. 10642–10653 · Source PDF 415

1ऊधो यह वही नदी गोविंद राधे।

2जिसमें बिहार किये कृष्ण बता दे॥ 10642॥

3यही वह गिरि है गोविंद राधे।

4जिस पै गायें चराये बता दे॥ 10643॥

5यही वह कुंज है गोविंद राधे।

6जहाँ नित्य रास किये कृष्ण बता दे॥ 10644॥

7ये ही वे गायें हैं गोविंद राधे।

8जिनको चराते थे कृष्ण बता दे॥ 10645॥

9आज भी मुरली की गोविंद राधे।

10तान सुनें हम निज कान में बता दे॥ 10646॥

11ब्रज का चप्पा चप्पा गोविंद राधे।

12कन कन पदचिह्न युक्त है बता दे॥ 10647॥

13उनकी चितवनि गोविंद राधे।

14मुसकनि कैसे भूलें बता दे॥ 10648॥

15अति मृदु बोलनि गोविंद राधे।

16हंस सी गवनि नहिं भूलें बता दे॥ 10649॥

17वे कमलापति गोविंद राधे।

18मेरे लिये मेरे पिय हैं बता दे॥ 10650॥

19चित को चुराया वाने गोविंद राधे।

20जीना मरना दूभर बता दे॥ 10651॥

21तुमने बार बार गोविंद राधे।

22हम सबकी की रक्षा बता दे॥ 10652॥

23सारा ब्रज यह गोविंद राधे।

24तुम बिनु शून्य सा हो गया बता दे॥ 10653॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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