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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 911

Reading 409 of 452 · Source nos. 10630–10641 · Source PDF 414

1अब हम सबकी गोविंद राधे।

2सुरति करें क्यों कृष्ण बता दे॥ 10630॥

3एक गोपी बोली गोविंद राधे।

4सखि जनि ऐसा बोल बता दे॥ 10631॥

5कृष्ण नयनाभिराम गोविंद राधे।

6आत्माराम पूर्णकाम बता दे॥ 10632॥

7वे हैं कमलापति गोविंद राधे।

8काऊ ते कछु नहिं चाहें बता दे॥ 10633॥

9वे हैं देने वाले गोविंद राधे।

10लेने वाले नहीं हैं बता दे॥ 10634॥

11कहा था पिंगला ने गोविंद राधे।

12आशा न रखना ही सुख है बता दे॥ 10635॥

13यह हम जानती हैं गोविंद राधे।

14फिर भी मिलन की आशा बता दे॥ 10636॥

15उनके आने की गोविंद राधे।

16आशा ही जीवन है बता दे॥ 10637॥

17देखो कमला भी गोविंद राधे।

18उनका संग नहिं छोड़े बता दे॥ 10638॥

19चला ते भी चला गोविंद राधे।

20कमला न छोड़े कृष्ण उर को बता दे॥ 10639॥

21हीरा मोती आदि गोविंद राधे।

22जब नहिं छोड़ें कृष्ण उर को बता दे॥ 10640॥

23तब कैसे कामिनी गोविंद राधे।

24गोपियाँ कृष्ण को छोड़ दें बता दे॥ 10641॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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