Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 910
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1जैसे वे हम ते गोविंद राधे।
2प्यार करते हैं ब्रज में बता दे॥ 10618॥
3वैसे मथुरा की गोविंद राधे।
4नारियों ते करें प्रेम क्या बता दे॥ 10619॥
5एक गोपी बोली गोविंद राधे।
6अवशि प्रेम करते होंगे बता दे॥ 10620॥
7मेरे पिय तो हैं गोविंद राधे।
8प्रेम के ही अवतार बता दे॥ 10621॥
9एक गोपी बोली गोविंद राधे।
10ऊधो साँची बात बता दे॥ 10622॥
11हम गमारियों की गोविंद राधे।
12कृष्ण कभु चर्चा करें क्या बता दे॥ 10623॥
13एक गोपी बोली गोविंद राधे।
14कृष्ण कभु रास सुधि करें क्या बता दे॥ 10624॥
15एक गोपी बोली गोविंद राधे।
16हम सब विरह में जले हैं बता दे॥ 10625॥
17किंतु हम उनकी गोविंद राधे।
18इच्छा में इच्छा रखे हैं बता दे॥ 10626॥
19क्या पुनि कृष्ण कभु गोविंद राधे।
20मिलन का सुख भी देंगे बता दे॥ 10627॥
21एक गोपी बोली गोविंद राधे।
22अब तो वे भये राजा बता दे॥ 10628॥
23ब्याह करेंगे काऊ गोविंद राधे।
24राजकुमारी ते ही बता दे॥ 10629॥