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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 909

Reading 407 of 452 · Source nos. 10606–10617 · Source PDF 412

1उसका कारण गोविंद राधे।

2मेरा ध्यान करो सतत बता दे॥ 10606॥

3तनु ते तो दूर रहो गोविंद राधे।

4मन ते समीप रहो नित्य बता दे॥ 10607॥

5परदेसी पिय का गोविंद राधे।

6जितना ध्यान करे प्रेमिका बता दे॥ 10608॥

7उतना प्रत्यक्ष गोविंद राधे।

8पिय को ध्यान हो ना जग में बता दे॥ 10609॥

9मेरे दिव्य रास में गोविंद राधे।

10जो गोपियाँ नहिं आ सकीं बता दे॥ 10610॥

11मेरे मनन ते गोविंद राधे।

12वे भी मुझे प्राप्त हो गईं बता दे॥ 10611॥

13याते निराशा को गोविंद राधे।

14भूलिहूँ लावो ना मन में बता दे॥ 10612॥

15कृष्ण संदेश सुनि गोविंद राधे।

16गोपियों को हुआ हर्ष बता दे॥ 10613॥

17गोपियों ने कहा गोविंद राधे।

18कंस को मारा हुआ अच्छा बता दे॥ 10614॥

19श्रीकृष्ण सुख ते हैं गोविंद राधे।

20यह बात और भी अच्छी बता दे॥ 10615॥

21हम सब गोपियाँ गोविंद राधे।

22उनका ही नित्य सुख चाहें बता दे॥ 10616॥

23यदि वहीं रह कर गोविंद राधे।

24उन्हें मिले सुख तो ना आवें बता दे॥ 10617॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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