Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 907
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1मैं श्रीकृष्ण का गोविंद राधे।
2एकमात्र हूँ गुप्त दूत बता दे॥ 10582॥
3उनका संदेश सुनो गोविंद राधे।
4हितकारक जो लाया बता दे॥ 10583॥
5ऊधो ने कहा सुनो गोविंद राधे।
6गोपियों अति भाग्यशालिनी बता दे॥ 10584॥
7कृष्ण का संदेश गोविंद राधे।
8मैं हूँ सबकी आत्मा बता दे॥ 10585॥
9सब का वियोग तो हो गोविंद राधे।
10मेरा वियोग कभु ना हो बता दे॥ 10586॥
11तुम सब का भी गोविंद राधे।
12होगा कभू न वियोग बता दे॥ 10587॥
13जैसे जगत की गोविंद राधे।
14सब भौतिक वस्तुओं में बता दे॥ 10588॥
15व्याप्त रहें नित्य ही गोविंद राधे।
16भू जल तेज वायु गगन बता दे॥ 10589॥
17पंच महाभूतों ते गोविंद राधे।
18बनी सब जग की वस्तुयें बता दे॥ 10590॥
19ऐसे ही मैं भी हूँ गोविंद राधे।
20सबका आश्रय एक बता दे॥ 10591॥
21सब ही मुझमें हैं गोविंद राधे।
22मैं भी हूँ सब में ही बता दे॥ 10592॥
23वस्तुतस्तु मैं ही गोविंद राधे।
24सब रूप में हुआ प्रकट बता दे॥ 10593॥