Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 906
Reading 404 of 452 · Source nos. 10570–10581 · Source PDF 409
1कभी हम दासियों की गोविंद राधे।
2चर्चा भी वे करें क्या बता दे॥ 10570॥
3कभी वे निज कर गोविंद राधे।
4मम सिर पै क्या धरेंगे बता दे॥ 10571॥
5जीवन में कभु गोविंद राधे।
6ऐसा दिन क्या होगा बता दे॥ 10572॥
7प्रेम की कुटिल गति गोविंद राधे।
8लखि बोले ऊधो ज्ञानी बता दे॥ 10573॥
9तुम सब गोपियो गोविंद राधे।
10धन्य धन्य कृतकृत्य हो बता दे॥ 10574॥
11समस्त साधन गोविंद राधे।
12कृष्ण प्रेम के ही हेतु बता दे॥ 10575॥
13तुम सब गोपियोँ ने गोविंद राधे।
14वही दिव्य प्रेम प्राप्त कर लिया बता दे॥ 10576॥
15तुम जहाँ खड़ी हो गोविंद राधे।
16वहाँ नाहिं जा सके योगी बता दे॥ 10577॥
17तुमने सर्वस्व तजि गोविंद राधे।
18किया अनन्य प्रेम कृष्ण ते बता दे॥ 10578॥
19तुम सब गोपियों ने गोविंद राधे।
20कृष्ण को माना प्रियतम बता दे॥ 10579॥
21कृष्ण तो सब के ही गोविंद राधे।
22प्रियतम आत्मा बंधु हैं बता दे॥ 10580॥
23तुम बड़भागिनी गोविंद राधे।
24जो प्रेम पाया कृष्ण का बता दे॥ 10581॥