Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 903
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1वामनावतार में गोविंद राधे।
2बलि ने पूजा की उनकी बता दे॥ 10534॥
3मुँहमाँगा दान गोविंद राधे।
4तीन पग पृथिवी भी दी बता दे॥ 10535॥
5फिर भी बलि को गोविंद राधे।
6बाँधि भेजा पाताल बता दे॥ 10536॥
7कारे कारे कपटी हों गोविंद राधे।
8लक्ष्मी तजि कुबरी को नारी बना दे॥ 10537॥
9समुद्र मन्थन ते गोविंद राधे।
10लक्ष्मी देवी हुइँ प्रकट बता दे॥ 10538॥
11बड़े बड़े देव ऋषि गोविंद राधे।
12वहाँ थे लक्ष्मी को चाहा भी बता दे॥ 10539॥
13मार्कण्डेय हैं गोविंद राधे।
14दीर्घ आयु शील मंगल ना बता दे॥ 10540॥
15शील मंगलमय गोविंद राधे।
16हिरण्यकशिपु तनु क्षणिक बता दे॥ 10541॥
17शिव में हैं दोनों गुण गोविंद राधे।
18किन्तु वेष के हैं अमंगल बता दे॥ 10542॥
19किन्तु श्री लक्ष्मी ने गोविंद राधे।
20तीनों में ही दोष देखा बता दे॥ 10543॥
21विष्णु में हैं सब गुण गोविंद राधे।
22किन्तु वे चाहते ही नहीं हैं बता दे॥ 10544॥
23किन्तु मैं चाहती हूँ गोविंद राधे।
24याते वरमाला हरि गर में पिन्हा दे॥ 10545॥