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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 902

Reading 400 of 452 · Source nos. 10522–10533 · Source PDF 405

1देख तू भ्रमर मेरे गोविंद राधे।

2पैर पै धरु जनि शीश बता दे॥ 10522॥

3हम सब जानें तू गोविंद राधे।

4क्षमा माँगने में है निपुण बता दे॥ 10523॥

5रीति मनाने की गोविंद राधे।

6सीखी होगी वाई ते बता दे॥ 10524॥

7भली भाँति जानि ले गोविंद राधे।

8यहाँ नाहिं दाल तेरी गलेगी बता दे॥ 10525॥

9श्याम अकृतज्ञ हैं गोविंद राधे।

10याते करें सन्धि कैसे बता दे॥ 10526॥

11रे रे मधुप सुनु गोविंद राधे।

12त्रेता में ये रामचन्द्र थे बता दे॥ 10527॥

13बाली को व्याध ज्यों गोविंद राधे।

14तरु ओट मारा राम ने बता दे॥ 10528॥

15कारे कारे कपटी हों गोविंद राधे।

16याते छुप कर बाली मारा बता दे॥ 10529॥

17कारे कारे कपटी हों गोविंद राधे।

18राम शूर्पणखा की नाक कटा दे॥ 10530॥

19सीता नारी के गोविंद राधे।

20थे वशीभूत सदा राम बता दे॥ 10531॥

21याते शूर्पणखा के गोविंद राधे।

22नाक कान कटवाये थे बता दे॥ 10532॥

23कारे कारे कपटी हों गोविंद राधे।

24बलि को छला बामन ने बता दे॥ 10533॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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