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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 900

Reading 398 of 452 · Source nos. 10498–10509 · Source PDF 403

1गोपी ने भ्रमर ते गोविंद राधे।

2कहा यह प्रेमसमाधि में बता दे॥ 10498॥

3रे रे भ्रमर तू गोविंद राधे।

4कपटी सखा कपटी का बता दे॥ 10499॥

5मेरे पैरों को गोविंद राधे।

6मत छू मत छू दूर जा बता दे॥ 10500॥

7झूठा प्रणाम करि गोविंद राधे।

8अनुनय जनि करु धूर्त बता दे॥ 10501॥

9सौत-उर कुंकुम गोविंद राधे।

10पीला लगा बनमाला बता दे॥ 10502॥

11तेरी मूछों पै गोविंद राधे।

12सोई लगा पीत कुंकुम बता दे॥ 10503॥

13जैसे तू मधुकर गोविंद राधे।

14एक पुष्प ते ना करे प्यार बता दे॥ 10504॥

15वैसे तेरे स्वामी गोविंद राधे।

16एक नायिका ते करें प्यार ना बता दे॥ 10505॥

17जैसा तू काला गोविंद राधे।

18वैसा तेरा स्वामी बता दे॥ 10506॥

19एक बार वाने दियो गोविंद राधे।

20हम सबको रस रास का बता दे॥ 10507॥

21पुनि हम सब को गोविंद राधे।

22तजि गयो मथुरा निठुर बता दे॥ 10508॥

23कमला छली गई गोविंद राधे।

24उनकी मधुर बातों में बता दे॥ 10509॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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