Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 899
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1वेश्या जब जाने गोविंद राधे।
2नर निर्धन है तजि दे बता दे॥ 10486॥
3राजा प्रजा का गोविंद राधे।
4ना दे साथ प्रजा त्याग दे बता दे॥ 10487॥
5जब लौं फल वृक्ष गोविंद राधे।
6बिनु ही बुलाये आवें पक्षी बता दे॥ 10488॥
7वृक्ष ते फल झरे गोविंद राधे।
8पक्षी भी उड़ि गये तुरत बता दे॥ 10489॥
9नारी का प्यार हो गोविंद राधे।
10जितना भी नर जार ते बता दे॥ 10490॥
11काम बन जाने पै गोविंद राधे।
12नारी ओर मुड़ि के न देखे बता दे॥ 10491॥
13जन्म ते किशोर तक गोविंद राधे।
14कृष्ण लीला सुधि आवे बता दे॥ 10492॥
15गोपियाँ भूलि गइँ गोविंद राधे।
16लोक वेद कुल की कानि बता दे॥ 10493॥
17एक ब्रजांगना को गोविंद राधे।
18सुधि आई पिय मिलन की बता दे॥ 10494॥
19उसने देखा पास गोविंद राधे।
20एक भ्रमर गुनगुनाये बता दे॥ 10495॥
21उसने समझा गोविंद राधे।
22श्याम ने जाना मोय रूठी बता दे॥ 10496॥
23याते मनाने को गोविंद राधे।
24भेजा है इस भ्रमर को बता दे॥ 10497॥