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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 898

Reading 396 of 452 · Source nos. 10474–10485 · Source PDF 401

1कान में कुण्डल गोविंद राधे।

2मुख पै है मुसकान बता दे॥ 10474॥

3श्याम सो सुन्दर गोविंद राधे।

4यह कौन है नाम क्या है बता दे॥ 10475॥

5चारों ओर ते गोविंद राधे।

6घेर लिया गोपी गण ने बता दे॥ 10476॥

7सब मन सोचें यह गोविंद राधे।

8कित ते आया दूत किसका बता दे॥ 10477॥

9कृष्ण जैसी क्यों गोविंद राधे।

10वेशभूषा भी धारे है बता दे॥ 10478॥

11जब यह ज्ञात हुआ गोविंद राधे।

12यह हैं ऊधो सखा कृष्ण के बता दे॥ 10479॥

13तब गोपियों ने गोविंद राधे।

14किया बहुत सत्कार बता दे॥ 10480॥

15कहा गोपियों ने गोविंद राधे।

16श्याम संदेश हैं लाये बता दे॥ 10481॥

17श्याम ने भेजा है गोविंद राधे।

18माता पिता सुख हेतु बता दे॥ 10482॥

19अन्य के साथ तो गोविंद राधे।

20सम्बन्ध स्वार्थ ते ही हो बता दे॥ 10483॥

21भौंरों का पुष्प ते गोविंद राधे।

22प्रेम संबंध स्वार्थजन्य बता दे॥ 10484॥

23नरों का नारियों ते गोविंद राधे।

24प्रेम संबंध हो स्वार्थ का बता दे॥ 10485॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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