Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 895
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1उस वाणी को गोविंद राधे।
2करेंगे सत्य अवश्य बता दे॥ 10438॥
3जैसे काष्ठ में गोविंद राधे।
4अग्नि रहे नित ही व्याप्त बता दे॥ 10439॥
5ऐसे सब जीवों में गोविंद राधे।
6श्रीकृष्ण भी नित्य व्याप्त बता दे॥ 10440॥
7श्रीकृष्ण समदर्शी गोविंद राधे।
8उनका प्रिय अप्रिय ना बता दे॥ 10441॥
9उनकी दृष्टि में गोविंद राधे।
10नहिं उत्तम नहिं अधम बता दे॥ 10442॥
11उनकी न माता है गोविंद राधे।
12उनका न कोई पिता है बता दे॥ 10443॥
13उनका न अपना है गोविंद राधे।
14उनका न कोई पराया बता दे॥ 10444॥
15उनका न देह है गोविंद राधे।
16उनका न जन्म मरण है बता दे॥ 10445॥
17उनका जगत में गोविंद राधे।
18कछु भी कर्म करणीय ना बता दे॥ 10446॥
19फिर भी भक्तहित गोविंद राधे।
20लै अवतार करें कर्म बता दे॥ 10447॥
21सात्विक राजस गोविंद राधे।
22तामस तनु धारें दिव्य बता दे॥ 10448॥
23देवादि सात्विक गोविंद राधे।
24मत्स्यादि तामस देह बता दे॥ 10449॥